कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 455, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड २२९
इस प्रकार, उस गुफा को सुरक्षित करके हम ऋक्षराज के पुत्र के साथ इस पर्वत पर रहने लगे । तब वाली उस मायावी के प्राण पीकर—
उन प्राणों को पीने से उत्पन्न नशे से मत्त होकर लौटा । गुफा-द्वार पर (अपने भाई को ) पुकारता रहा । किन्तु, कोई उत्तर न पाकर वह सोचता हुआ कि मेरा भाई भी मेरी रखवाली कर रहा है, अत्यन्त क्रुद्ध हुआ ।
फिर, उस (वाली) ने अपनी पूँछ उठाई और अपने पैरों को उठाकर ऐसा आघात किया, जैसे प्रमंजन वज्र उठा हो । तब (गुफा के द्वार पर रखे ) सब पर्वत आकाश में उड़कर समुद्र में जा गिरे ।
वाली (उस गुफा से ) बाहर निकलकर सबको भयभीत करनेवाले क्रोध से मत्त हुआ इस पर्वत के ऊँचे शिखर पर आ पहुँचा, तब सत्य-मार्ग पर चलनेवाले और कपटहीन इन सूर्यपुत्र ने उसके समीप आकर उसके चरणों को नमस्कार किया ।
प्रणाम करके वाली से सुग्रीव ने कहा—हे अग्रज ! हे प्रभु ! बहुत दिनों तक तुम्हारे न लौटने पर मैं बहुत चिंतित हुआ और तुम्हारे निकट आना चाहता था । किन्तु, तुम्हारी प्रजा ने इससे सहमत न होकर कहा कि राज्य पर शासन करना ही मेरा कर्त्तव्य है ।
हे आभरणों से भूषित भुजावाले ! प्रजा की आज्ञा मानकर, राज्यभार वहन करता हुआ मैं निर्लज्ज-सा जीवित रहता हूँ । तुम मेरे इस अपराध को क्षमा करो । सुग्रीव का कथन सुनकर वैरभाव से भरे हुए वाली ने अत्यंत क्रोध के साथ अनेक निष्ठुर वचन कहे।
बलिष्ठ भुजाओं से युक्त उस (वाली ) से हम सब वानर यों डरने लगे कि हमारी आँतों में हलचल मच गई । पूर्वकाल में समुद्र को मथनेवालों ने अपने करों से सुग्रीव को मार-पीटा, जिससे यह बहुत पीडित हुआ ।
यह बहुत पीडित होकर सात समुद्रों के पार, ब्रह्मांड की बाहरी सीमा की दीवार पर जा पहुँचा । पीडा-हीन वाली भी पवन के समान इसके पीछे चलकर सप्त समुद्रों को सिंह के समान फाँद गया ।
वायुपुत्र के इस प्रकार कहने पर, प्रभु कह उठे—अच्छा ! अति वेग से पीछा करनेवाले वाली के आगे-आगे भागनेवाला सुग्रीव वाली से भी अधिक वेग से फाँद सकता था।
वीर-कवचधारी कृपामूत्ति (राम) ने अपने भाई लक्ष्मण-समेत इस प्रकार आश्चर्य करते हुए फिर कहा—इन दोनों वीरों ने आगे क्या किया; सुनाओ । तब विनय से भूषित मारुति कहने लगा—
सुग्रीव मकरों से भरे सातों समुद्रों के पार चला गया । किन्तु, उस चक्रवाल पर्वत को भी जहाँ सूर्य की रक्तिम किरण भी नहीं पहुँचती है, पारकर वह (वाली,) वहाँ आ गया और सुग्रीव को पकड़ लिया ।
भाई को पीड़ित करने के अपवाद से न डरकर उसने सुग्रीव को अपने क्रूर करों से मारने के लिए अपना हाथ ऊपर उठाया । किन्तु, सुग्रीव मौका पाकर झट वहाँ से निकल भागा ।
हे प्रभु ! यदि वह (वाली) क्रोध करके दाँत पीसे, तो यम को भी सुरक्षित रहने