कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 473, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड ४६५
के आयुध वज्र में इतनी शक्ति है कि वह मेरे वक्ष में प्रवेश कर सके ? यह क्या है ?—इस प्रकार सोच-सोचकर वाली व्यथित होता ।
अति वेग से अपने वक्ष में धँस जानेवाले उस शर को देखकर वाली यह सोचता हुआ आश्चर्य करने लगता कि यह बाण एक धनुष से प्रयुक्त हुआ हो, यह असम्भव है। तब क्या ऋषियों ने मन्त्रों के प्रभाव से इसे प्रयुक्त किया है ? फिर, दीर्घकाल तक अपने दाँतों को पीसता रहता ।
अब उसे यह ज्ञात हुआ है कि यह एक शर ही है। अनेक शंकाएँ करते रहने से क्या प्रयोजन है ? प्राणों के साथ मेरे वक्षःस्थल को छेद डालनेवाले इस अनुपम शर को दोनों हाथों, पूँछ और पैरों से निकालकर इसे प्रयुक्त करनेवाले वीर का नाम जान लूँगा— ( अर्थात्, शर पर लिखे नाम को पढ़कर उसके प्रयोक्ता को जान लूँगा )—यों विचार कर वह बाण को निकालने लगा।
अत्यधिक दृढता से युक्त मनवाले तथा अत्यन्त व्याकुलता से भरे सिंह-समान वाली ने उस शर को पकड़कर थोड़ा खींच लिया । वह दृश्य देखकर देवताओं, असुरों तथा अन्य लोगों ने विस्मय में पड़कर अपनी भुजाओं को फुला लिया । वीरों के प्रति विस्मय भी न दिखावे, ऐसे कौन होंगे ?
उस समय ( वाली के वक्ष से ) जो रक्त-प्रवाह हुआ, वह जंगलों और ऊँचे पर्वतों को लाँघकर वह चला, मानों वह समुद्र में जाकर मिलने के लिए ही बहा हो । क्या उसका ऐसा वर्णन करना उचित हो सकता है कि वह ( रक्त-प्रवाह ) ऊँची तरंगों से पूर्ण समुद्र-जैसे गर्जन करता हुआ, सब लोकों को पार कर उमड़ चला ?
सुरभित पुष्पहारों से भूषित ( वाली ) के वक्ष-रूपी पर्वत से बहनेवाले शब्दायमान रक्तप्रवाह को देखकर, सहोदरत्व-रूपी बंधन से बँधा हुआ उसका भाई सुग्रीव, अपनी पीली आँखों से प्रेमाश्रु बहाता हुआ धरती पर गिर पड़ा ।
मेरु को तोड़ने की शक्ति से युक्त वह यशस्वी ( अपने शरीर से ) निकाले हुए शर को अपने विशाल तथा बलवान् हाथो मे लेकर पहले यह सोचा कि मैं इसे तोड़ दूँगा । किन्तु, फिर यह कहता हुआ कि मेरे प्रयत्न करने से भी यह बाण टूटनेवाला नही हैं, उस पर अंकित नाम को देखने लगा ।
जो तीनों लोकों के लिए मूलमंत्र है, जो उसका जप करनेवालों को स्वय को ही (अर्थात्, अपने वाच्य भगवान् को ही) पूर्ण रूप से दे देता है, जो इसी जन्म में सातों प्रकार की ( योनियों १ मे जन्म लेने की ) व्याधियों से मुक्ति देनेवाला औषध हैं, उस अनुपम महिमामय राम-शब्द को वाली ने अपनी आँखों से देखा ।
गृहस्थ-धर्म का त्याग कर ( वनवास मे ) आये हुए तथा मेरे जैसे व्यक्ति के लिए अपने कुल-क्रमागत धनुर्युद्ध के धर्म को भी छोड़नेवाले, ऐसे वीर के उत्पन्न होने के कारण, वह सूर्यवंश भी, जिसने वेद-प्रतिपादित धर्म को कभी नहीं छोड़ा था, आज सनातन धर्म से
१. सात योनियां—मनुष्य, देवता, पशु, पक्षी, रेंगनेवाले प्राणी, स्थावर और जलचर ।—अनु०