कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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९४ कान्हडदे प्रबन्ध कान्हडदेनी घरणी हती, तेह भणी लिषी वीनती । उमादे नई कमलादेवि, जइतलदे नई भावलदेवि ॥ १४९ इस्यूं कहिउं अम्ह वीतूं जेह, हवइ वीचस्यइ कालि तझ तेह । अम्हस्यूं प्रीति आणेज्यो घणी, आणइ जमारइ मोकलावणी ॥ १५० इसूं कही नवि लाई वार, राणी सवि कस्या सिणगार । चंदनकाठ आणीउ घणउ, तिहां परिवार मिलिउ तेह तणउ ॥ १५१ साहस प्रभावि एतली आहि, राणी पइठी जमहर माहि । राम राम वाणी उच्चरइ, सजन लोक सवि आंसू पिरइ ॥ १५२ १४९. कान्हडदेनी-चांन्हडदेनी A J, कान्हडदेनि C, कांहानडदेनी H, कान्हडदेनइं L. घरणी-घरणि D, घरणी H, घणी J. लिषी-लपी B D H J, सुं लिखी C. उमादे-उमादे B J, ऊंमादे D