कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
पृष्ठ 171, कुल 354 में से
संदर्भ में पढ़ें५८ कान्हडदे प्रबन्ध ऊछ्यां लोह न लाभइ पार, राउत भला करइ हथीयार । जिस्यूं युद्ध रावण नइ राम, जिसउं देव असुर संग्राम ॥ १६५ हींदू सवे एकमना भिडइ, पोसाता पायक रिण पडइ । त्रिणि पुहर दल सामहउ भिड्यउ, घणे घाए सांतल रिण पड्यउ ॥ १६६ साहस प्रभावि एतली आहि, राउत भिडी रह्या रिण माहि । सांतल तणउं रुधिर सुरताणि वांचउं बीरायतन वपाणि ॥ १६७ पदमनाभ पंडिति मति कही, बीजा पंड समापति हुई ॥ १६८ A H, सि B, सि J. दलह--दलिइं A B D, दलि C J. हींदू-हीदू A H J L, हिंदू C. तुरक--तरक C H. भै--त्रि H J. रोले-मोटा A L, टोले D, टोलि H J, लोहे K. मिलइ--भिडई A L, मिलिइ B, मलि C, मिलई D, मिलि H J. १६५ ऊछ्यां-छटियां A, उडिया B, ऊछ्यु D, ऊष्याउ K, ऊछ्यो L. लाभइ--लाभि B C H J. पार-- पारि L. भला--भलां C, भेलां H. करइ--करि B C H J, करई D. हथीयार--हथीआर C H J, हथियार K, हथियारि L. जिस्यूं-जिसूं A, जिमुं C H, जिस्युं D, यतियां J, जिसउ K, जिसडं L. युद्ध-युष A C D L, जूष H, शुद्ध K. रावण नई--रामण नइ A L, रावण नि B C D H J, रावण नै K. राम--रांम A D H J K. जिसडं- जिसु B, तिसुं C, जिम D J, जिसिडं H, तिसउ K. देव असुर--देवासुरि A, युध असुरां C, वासुदेव असुर D J, देवासुर H, जिम वासुदेव I1(ख), असुर सातिल K, देव असुरा L. संग्राम-संग्रामि A, संग्राम D H. १६६ हींदू-हींदू B D, हिंदु C. सवे--सवि D H J K, सवइ L. भिडइ-भडिइ B, भडि C, भडई D, भडइ H, भिडि J, भिडई L. पोसाता--पोस्ता K, पातिसाहि L. रिण-रणि B C D, रण H. पडइ-पडई A, पडिइ B, पदि C H, पुडई L. ii qr in J is: पायक सवि पोसाता पडि. L omits vs 166 b. त्रिणि- त्रिण A, त्रणि C H. पुहर--पहुर A, पुहुर J, प्रहर K. सामहउ em-सांम्हां A, साहमु B D H, सांमु C, सांहमूं J, सांम्हउ K. भिड्यउ--भिड्यां A, भिडिओ B, भडिउ C, भड्यु D, भडुउं H, भिडतं J. घणे--घणि C, घणा J. घाए-धाइ B K, घाय D, योधशुं J. सांतल--सातिल K. रिण-रणि B C D, रण H, ...J. पड्यउ-पडिउ A B C J, पड्यु D, पडिडं H. १६७ साहस--साहण H. प्रभावि-प्रभावि B D, प्रभावइ K, प्रभाविइ L. आहि--आंहि D. भिडी-भडी B C D H J. रह्या--रहीया A, रहिया B H J. रिण--रण B C D H J. माहि--माहि B C D J L. सांतल-- सातल A, साति K. तणउं--तणु B, तर्मु C D, तणूं H J, तणउ K, राणउ L. रुधिर--रुधिर L. सुरताणि-- सुलतानि B, सुलतांणि C, सुरताणि D J, सूरतांगि H, सुरतांग K, सुरिताणि L. वांचउं--पढवी B, वांदिउं C H J, वाधु D, बांधउ K, बंधउ L. बीरायतन--बीरातन A C, राउत तणू B, बीरायत H I1(ख), बीरायतनि J, बीरायतन L. वपाणि--वपाण B, वाणि D, निखांणि H, विपाणि K. C interpolates the follow- ing line after vs 167 : सती सइ च्यार पाचज हुई असुराणि तिहा जयतज भई. १६८ पदमनाभ--पद्मनाभ B D, पद्मनाभि K L. पंडिति--पंडित B C H J K L, पंडिता D. मति--इम C K. कही--कहइ K. बीजा--भीजो K L. पंड--खंड C J, पेंड K. समापति--समाप्ति A, समाफ्त L. हुई-- हुई D, यह हुइ H, हुई K. Note--The colophons of the second khaṇḍa are : इति द्वितीय पंड समाप्तं ॥ A; ...... B, इति श्री कान्हडदे द्वितीय खंड समाप्तः द्वितीयमज्ये अलावदीन पातसाहि भाउर मलिक मोकल्या ते समीआणे गढरोहु करिड सांतलजी चहुंआन भडी भागु पातसाहि समीआणे गढ लीधु बीजि पंडि १५८ गाथा ॥ C; इति कान्हडदे चतुर्थखंड द्वितिय खंड स्मातं ॥२॥ D; इति द्वीतीअ पंड समाप्तत ॥ H; इति श्री द्वितीय पड समाप्तत ॥ J; इति द्विती पंड समाप्ततः K; इति राजा श्री कान्हउदे द्वितीय षंड समाप्तः ॥ L.