कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
पृष्ठ 235, कुल 354 में से
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चतुर्थ खंड ॥ चउपई ॥ चउथा खंड तणउ आरंभ, बोलइ पदमनाभ कवि ग्रंभ । संतोष्यउ सजन संयोग, तउ पातिसाह थयउ आरोग ॥ १ सरिउं काज मनि पूगी रली, पातसाहनइ बेटी मिली । ततपिण पूछिउं असपति राइ, किम तइं मलिक छोडाव्या माइ ॥ २ बोल बापनउ हईइ धरी, सकल सरूप कहिउं कुंअरी । कान्हडदे छइ जीणइ ठाय, ते जालहुर किसुं छइ माय ॥ ३ एहवुं वचन पातिसाहि कहिउं, कुंअरी पीरोजा आयस दीउं । गढनी बात पीरोजउ भणइ, सावधान थिउ राजा सुणइ ॥ ४ १ चउपई-...E J K L. चउथा-चुथा B D E J, उचाया L. तणउ-तणु B C D J, तणो E. आरंभ- प्रारंभ A B C, आरंमें L. बोलइ-बोलि B C J, बोलेइ D, बोलइं L. पदमनाभ-पद्मनाम B, पदम