भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

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चतुर्थ खंड २३१ लिष्मीवंत पेतसी तणउ, अपइराज सोनिगिरउ भणं । ब्राह्मण तणा कराव्या ज्याग, सत्रा लाप जिणि दीधा त्याग ॥ ३३६ अपयराज केतसूं वपाण, जिणि सवि सांभल्यां पुराण । कीरति पुण्य तणी विस्तरी, विष्णु भगति जिणि साची करी ॥ ३३७ भोजन वारि नितु अपइराज, अतिथि भणी मूकावी बाज । जनम लगइ जयवंतउ सुण्णउ, परनारीसहोदर भण्णउ ॥ ३३८ अपइराज उत्तम अवतार, जेहनां पुण्य न लाभइ पार । जीणइ कीरति कान्हडदे तणी, अपइराजि अजून्याली घणी ॥ ३३९ वीसलनगरउ नागर एक, पदमनाभ कवि पुण्यविवेक । एहवुं विरद आदरइ अनी, लहइ बुद्धि कविजनरंजनी ॥ ३४० ३३६ लिष्मीवंत-लक्ष्मीवंत A L, लषमीचंद B, ल्यमीवंत C, लषिमीवंत J. पेतसी तणउ-तणु षेतसी तणु B,