भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

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२३२ कान्हडदे प्रबन्ध माइ भारती तणइ पसाइ, अक्षरबंध बुद्धिरस थाइ । अपइराज सीपामण सरी, पदमनाभ कीरति विस्तरी ॥ ३४१ सांभलतां सरीर उल्हसइ, चउपई बंध इसी इग्यारसइ । च्यारि पंड जिस्यां नवनीत, दूहा चउपई मधुरां गीत ॥ ३४२ पंचचालीसउ पूठि वरीस, मास मागसिर पूनिम दीस । संवत पंनर बारोतरउ, तिणि दिनि सोमवार विस्तरु ॥ ३४३ जालहुर गढ उत्तम ठाउ, राउल कान्ह मालदे राउ । पदमनाभ मति आणी नवी, तेह तणी कीरति वर्णवी ॥ ३४४ एकचित्ति जे नर सांभलइ, तेह तणां सवि दुकृत टलइ । जे फल लाभइ दीधइ दानि, जे फल गंगा तणइ स्नानि ॥ ३४५ ३४१ माइ-माय C D, माता J. भारती-भगवति J. तणइ-तणि B C J. पसाइ-पसाय B C D, सुपसाय J, पंसाइ L. अक्षरबंध-अक्षरविधि B, क्षयरबंध K. बुद्धिरस-बंधिरस B, वाधिउ रस C, बुद्धि तिणि J, युधि रस K L. थाइ-धाय C D J. अपइराज-आपिराज B, अधिराज C, अयवराजि D, अयवराज J, आपइराज L. सीपामण-(.) पामन A, सीपांमण C D, शीपामणि K, शीपामण L. सरी-सरि D. पदमनाभ-पद्मनाभ B, पंदमनाभि K, पद्मनाभि L. कीरति-किरति D. विस्तरी-वीस्तरी D. ३४२ J omits vs 342 a. सांभलतां-सोभलता K. सरीर-शिरीर A, शरीर B, सरिर D, शिरीर L. उल्हसइ-उल्हसिइ B, उलसि C, उल्हसे D, उल्हास K, उल्हसइ L. चउपई-चुपई B C, चूपई D, चउपई K, चुपइ L. बंध-बांधी C. इसी-इशी A, असी B C, सइ K, इसी L. इग्यारसइ-नुबसई A, सातसि B, नवति C, सातसइ D, ग्यारिसइ L. च्यारि-च्यार C K. जिस्यां-जिंसा A, जसया B, जसया C, जेस्या D, जिस्या J, जईसां L. नवनीत-निशि दीस B. दूहा-दू(.) A. चउपई-(.) उपई A, चुपई B C L, चूपई D, जुपै J, चउपही K. मधुरां-सुधरा A, मधुरा D, मजुरा K L. Note-L ms ends here; its last folio is lost. ३४३ पंचचालीसउ-पंचतलीसु A, पंचतालीश B, पंचतीजमुं D, पंचतालीसम J. पूठि-पूंठि D. मागसिर- मागशिर D, मागशिरि J. पूनिम-पूंनिम A. संवत-सर्वत D. पंनर-१५ पनर A, पनर J, १५ K. बारोतरउ- बारोतह B J, बारोतहरू D, १२ तरह K. तिणि-तिनि B, निणइ D. दिनि-दिवसि J, दिन K. सोमवार- सोमवारु B. विस्तरु-(..)रु A, विस्तरइ K. C reads vs 343 as below and places it after vs 344 : संवत पनर १५१२ बारोतर सार माइ मास पुंन्यम सोमवार । जाल्लुर गढ घण उलट धरी गायु कान्ह विरोधि करी ॥ ३४४ जालहुर-जालेर A, जालोहर B, जाल्होर C, जाह्लुर D, जालउर K. उत्तम-उतम A, उत्तिम K. ठाउ-ठाम A B, ठांम J K. राउल-राय J. कान्ह-कांन्ह A, कान्हर D, कान्हडदे J. राउ-नाम B, नांम J K. ii qr in C is : राज करि कान्हडदे राउ. पद्मनाभ-पमनाम B, पदमनाभि K. आणी-आणइ A D, आणि C J, आणी K. B transp as : कीरति तेह तणी. वर्णवी-वरणवी C. ३४५ J omits vss 345-350. चित्ति-विति A, चित B C D. जे-(.) A. सांभलइ-हांभलिइ B, सांभडि C. दुकृत-दुःकृत B C D टलइ-टटिइ B, टनि C. लाभइ-लाभि B C. दीधइ-दीषि B C. दानि- दॉनि A, दोन C K. गंगा-गंग B D. तणइ-तणि B, तेणइ D. स्नानि-शनानि A K. iv qr in C is : ए सामडि हुइ गंगस्नान.