भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

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(१५६) Row 13: तुरक थया मूंगल करकटीया | १ | १४६ Row 14: तुरक सबल संनाहइ भारी | ४ | २१२॥ Row 15: तुरका ये नीसाणज होतां | ३ | १३॥ (Wait, १३॥ or ९३॥? Looking at line 14: २१२॥. Line 15: खंड ३, पद्यांक १३॥ or ९३॥. Wait, in Khanda 3, verse 93 is: तुरका ये नीसाणज होतां? Wait, Khanda 3 has around 250-300 verses. Ninety-three is ९३. The digit has a loop at top left and curves down: ९३॥) Row 16: तुरकां तणउ पार नवि लहूं | ४ | ७१ Row 17: तुरके हींदू नवि आंगम्या | ३ | १६३ Row 18: तुरी पुरातल घरणी पणइ | ३ | ६७ Row 19: तुरी सहस छत्रीस पाषरीया | ३ | १४ Row 20: तुरी सहस छत्रीस मेलीआ | ४ | १०३ Row 21: तुलतीपानि कान्ह नवि पूज्या | १ | १७१ Row 22: तुठउ पान भणइ—तूं हींदू | १ | १५० Row 23: