कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें... चीतंगद हार सुभणी मांस वंध भकत अमर वारमंल"
Line 11: "ली गोरा गुं मियन वं तू हव कुंभर बोल हुं गल कम्प मंधू तरु श्री नारायण की तु पुहाव पास्त वयं १४ रा क्स" Wait: after मंधू तरु: "श्री नारायण कीतु पुहाव पास्त वयं १४ राक्स" (or १३ somewhere?) Wait, look at line 10/11: Verse 12 is in line 10 ("१२"). In line 11: is there १३? Look at "मंधू तरु": between मंधू and तरु is there a १३? Wait: "मंधू तरु श्री नारायण कीतु" - wait, there is "१३" or "तरु"? Let's check: "मंधू १३ श्री नारायण कीतु"? Wait, look at that word: "मंधू" then "१३" - ah! It looks like "१३" or "तरु"! Wait, looking closely: it's "१३" with a stroke! Yes, 13! Then "श्री नारायण कीतु पुहाव पास्त वयं १४ राक्स"
Line 12: "विजो ल्हिला रुप सो ह नि विहंग राज रुदिय र प्य फणि परू श्रंगान चरण १५ युपद निरि अव व मरि