कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)
Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary
कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished354 पृष्ठ
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[शीर्षक / पृष्ठ-परिचय] राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला | कान्हडदे प्रबन्ध
[पाण्डुलिपि पाठ : प्रथम पृष्ठ (Folio 1 Verso)]
॥ए णं॥ गोरीनंदन नीत नवौ ब्रह्मसुता सरसति। सारदवीणास्रुतिकरुं वाचउमल्ल निर्मलमति॥१॥ आदियु- ग अवधारि हिया। दंतजलजयवंता असुरवधोत्री निकंददाता जुगसुरसंता। किंतारणि जिनमत जन्म गाहं ति- णि लघीयउ। वासेदेवधुरिदीत जिनिसंपाउमतेरीउ॥२॥ त्रपद तत णघट्टि टुक कविवाणी वचन सुचंगा। रुति सेति सिरी तणी॥ तिउअरीसुचि गीअ जालउ हरुउ दलिताणि दिस सामंत सीसुत ते अतासत एण पुण की- धूं कीरति कान्हडदे तणी। नवकोटी नांनि तिम तांणिऽसामइ आविहि धण देसाधण कणग भरितावकहितणि डाफाया उकणि सुइयदेवा॥३॥ दूहा॥ एक पाय वलनगिराणि श्श्राग तिणि तणुणं वाविलित तहा इरालग