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कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)

स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा द्वारा

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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पृष्ठ 83

पाँचवाँ अध्याय

७७

सबका तात्पर्य मनुष्य को बन्धन से छुड़ा कर मुक्ति दिलाने का है। केवल मूर्ख और अज्ञानी पुरुष ही कहा करते हैं कि ज्ञान और कर्म में भेद है। विद्वान् लोग जानते हैं कि यद्यपि उनकी अवस्था और अधिकार में कुछ भेद हो, तथापि उन दोनों का लक्ष्य और उद्देश्य एक ही है।