भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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रहेगा और अन्य कुछ भी नहीं रहेगा; सब मिट जायेगा । जो वहाँ से आयेगा, वो उसकी ख़बर कहेगा। जिसको वो नज़र आ गया, फिर वो कुछ न चाहेगा । इसलिए हे हंस! तू उसी देश को चल ।

हंसों की हुन खूबी कही जाए सो कैसे ।

यह नातिकः गुम सुम्म बयां कीजिए ऐसे ॥

एक मूय मुनौविर कह इस नूरका जैसे 1

छिप जाय करोड़ों महेहुर तलअत तैसे ॥

सब हंस पुरुष रूप पुरुष उनको दुलारे ।

चल हंस अचल मोलिदो मावाय हमारे ॥

वहाँ हंसों की सुन्दरता का बखान नहीं किया जा सकता है। करोड़ों सूर्य और चंद्रमा वहाँ के प्रकाश के आगे फीके पड़ जाते हैं । परम - पुरुष वहाँ सब हंसों से प्रेम करते हैं । हे हंस ! तू भी वहाँ चल ।

जहाँ रात न दिन है व नहीं सूरज चंदा ।

सोहंग दुरै चँवर करे पुरुष अनन्दा ॥

यक मूरत सारे न खुदावन्द न बन्दा ।

इस मंजिल नजदीक नहीं काल का फंदा ॥

जिस लोक हमेशा को परमहंस पधारे ।

चल हंस अचल मोलि दो मावाय हमारे ॥

वहाँ न रात है, न दिन है, न सूर्य है, न चाँद, न कोई खुदा, न बन्दा । सब उसी के रूप हैं । जिस लोक में परमहंसों का आना-जाना लगा रहता है, है हंस! तू भी उस देश में चल । सतगुरु की शरण लेके चलो बहके उस पार । वह कादिर मुतलक हुवा जिस जीव का

मददगार ॥

पहुँचावे वतन में न बुतन में होवे कर पल में सुबुक दोष उठा उसका गरां बार । आजिज से गुनहगार कतारों को जो औतार ॥ तारे ।

चल हंस अचल मोलिदो मावाय

हमारे ॥

हे हंस ! सतगुरु की शरण ग्रहण कर, क्योंकि वो ही जीव का सच्चा सहायक है। वो तुझे पल में वहाँ पहुँचा देगा। वो तेरे सब दोषों को मिटाकर तुझे वहाँ ले जायेगा। हे हंस ! इस तरह सद्गुरु की शरण लेकर उस देश में चल।