करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाहिब कह रहे हैं कि यह घट ईश्वर का मंदिर है, पर इसमें गुरु के बिना प्रवेश नहीं करना । यदि ऐसा किया तो बिना सिर कटे ही मरोगे। अन्दर की दुनिया में घना अँधकार फैला हुआ है। वहाँ नाम प्रकाश की ज़रूरत है। 'शून्य महल में घोर अँधेरा, करो नाम उजियारा ।' और नाम गुरु के द्वारा ही मिलेगा । गुरु बिन मुक्ति न पावै भाई । नर्क उर्ध्वमुख वासा पाई ।। गुरु बहुत ज़रूरी है।
गुरु बिन पढ़े जो वेद पुराना । ताको नाहिं मिले भगवाना ।।
गुरु बिन प्रेत जन्म सो पावै । वर्ष सहस्र गरभ रहावै ।।
गुरु बिन दान पुण्य जो करहीं । मिथ्या होय कबहुँ नहिं फलहीं ।।
गुरु बिन भर्म न छूटे भाई । कोटि उपाय करे चतुराई ।। निगुरा करे मुक्ति की आसा । कैसे पावै मुक्ति निवासा ।।
औरो शूकर देह सो पावै । सतगुरु बिना मुक्ति नहिं पावै ।।
गुरु बिन आतस कैसे जाने । सुख सागर कैसे पहिचाने।।
भक्ति पदारथ कैसे पावै । गुरु बिन कौन राह बतलावै ।।
गुरु बिन लख भरमे चौरासी । जन्म अनेक नरक के वासी ।।
गुरु बिन पशु जन्म सो पावै । फिर फिर गर्भवास में आवै ।।
साहिब कह रहे हैं, गुरु के बिना मुक्ति नहीं मिलेगी। गुरु के बिना तो मनुष्य नरक में ही जायेगा । जो गुरु के बिना वेद, पुराण आदि पढ़ते हैं, उन्हें प्रमात्मा नहीं मिलता। गुरु के बिना तो प्रेत योनि में भी जा सकता है और हज़ार साल का महादुख भोगना पड़ सकता है । जो गुरु के बिना दान, पुण्य आदि करते हैं, उनके सब कर्म बेकार जाते हैं; वो फलित नहीं होते । गुरु के बिना कितने भी उपाय कर लो, भ्रम नहीं छूट सकता है। निगुरे इंसान की मुक्ति की आशा बेकार है। गुरु के बिना आत्म-ज्ञान नहीं हो सकता है । गुरु के बिना जीव चौरासी में ही फिरता रहेगा और बार-बार गर्भवास में आता रहेगा । इसलिए समझाते हुए कह रहे हैं-
तेहि कारण निश्चय गुरु कीजै । सुर दुरलभ तन खोय न दीजै ।।
कह रहे हैं कि यह सब विचारकर गुरु ज़रूर करना । देवताओं को भी दुर्लभ इस मानव-तन को बेकार में नहीं जाने देना ।