करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 201, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंनाम सत्य गुरु सत्य हो, आप सत्य जो होय ।
तीन सत्य जब एक हों, विष से अमृत होय ॥
यह तीसरा आप सत्य कैसा ? जो गुरु कहता चले, करते जाना । अपनी अक्ल नहीं चलाना, अपने मन की नहीं करना । जो गुरु कहे, वो करना ।
खाक हो गुरु के चरण में, तो तुझे मंजिल मिले ॥
नहीं सोचना कि जो मैं सोच रहा हूँ, वो ठीक है ।
मुझे है काम सतगुरु से, दुनिया रूठे तो रूठन दे ॥
कभी ऐसी भी परिस्थिति आयेगी कि पूरी दुनिया कहेगी कि यह काम ठीक है, पर गुरु कहेगा कि यह ठीक नहीं है । तो गुरु की मान लेना। एक महापुरुष दुनिया की धारा में नहीं बहता है । वो दुनिया की धारा से बाहर निकल जाता है। वो मन - माया की सीमा से बाहर है । इसलिए उसकी मान लेना। बस, बाजी आपके हाथ में आ गयी। दुनिया कहे कि फ़लानी जगह माथा टेको । आप मत सोचें कि दुनिया नाराज़ हो जायेगी । होने देना ।
गुरु आज्ञा ले आवही, गुरु आज्ञा ले जाय ।
कहैं कबीर वा दास फिर बहु विधि अमृत पाय॥
गुरु-आज्ञा से बड़ी उपासना नहीं है । जो गुरु - आज्ञा का पालन कर रहा है, वो गुरुमुख है।
गुरु आज्ञा ले आवही, गुरु आज्ञा ले जाय ॥
यही गुरु-भक्ति है। गुरु भक्ति अटल अमान अडोल धर्मन, यह सरस दूजा नहीं ।
जप योग व्रत तप दान पूजा, तृण सदृश यह जग कही ॥
तीर्थ, पूजा आदि तिनके के समान हैं गुरु-भक्ति के आगे । फिर तन, मन, धन से गुरु की सेवा करनी है। गुरु सेवा का महत्व है । साहिब वाणी में कह रहे हैं—
गुरु सेवा जो करे सुभागा। जन्म जन्म का पातक भाजा ॥
जन्म-जन्मांतर के पाप नाश हो जायेंगे। आगे कह रहे हैं-
गुरु सेवा से हृदय प्रकाशे ॥
हृदय प्रकाशित हो जायेगा ।