भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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है। कभी किसी ने नहीं कहा कि महाराज, पहले हनुमान जी की भक्ति करते थे, अब वो गदा लेकर हमें मार रहा है। इसलिए यक़ीन करना पहले। हम कोई शास्त्रों के ख़िलाफ़ नहीं हैं । हम कह रहे हैं-

देवी देवल जगत में, कोटिक पूजे कोय।

सतगुरु की पूजा किये, सबकी पूजा होय ॥

एक सद्गुरु की उपासना से सबकी भक्ति हो जाती है। कुछ कहते हैं कि आदमी को मान रहे हैं, देवी-देवते छोड़ दिये। पहले देखते हैं कि शास्त्र किसका ध्यान कह रहे हैं । हमने किसी की निंदा नहीं की। हमने इतना कहा है कि ये निरंजन का संदेश दे रहे हैं । आखिर किसकी पूजा के लिए कहा । वेद भी कह रहा है—

ध्यान मूलम् गुरु रूपम्, पूजा मूलम् गुरु पादकम् ।

मंत्र मूलम् गुरु वाक्यम्, मोक्ष मूलम् गुरु कृपा॥

एक ने कहा कि जो नाम आप दे रहे हैं, आपने कहा है कि वाणी का विषय नहीं है, बोल नहीं सकते हैं। पर वो तो हम बोल भी सकते हैं । मैंने कहा कि तुम ठीक से समझे नहीं । अब तार है, उसपर बिजली चलती है। बस, ऐसे ही है। वो तार है । पर तार पर विदेह नाम आपके अन्दर दिया है। G कुछ कहते हैं कि स्त्री का गुरु उसका बंदा होता है । उसे गुरु करने की क्या ज़रूरत है ? एक माई आई; कहा कि बंदा नहीं आने देता है । मैंने पूछा कि क्या कहता है ? कहा कि पहले हत्या का नुक्स था। अब आपके पास आकर ठीक हूँ। वो खाता-पीता भी है। जब आती हूँ तो कहता है कि जनानी का कोई गुरु नहीं होता है, जनानी का गुरु होता है - उसका बंदा । मैंने कहा कि उसे लाना। कहा— आता नहीं है। मैं फिर उसे कहता कि भजन करना । वो कहती थी कि भजन नहीं करने देता। मैंने कहा कि वो कोई तेरी साँस में थोड़ा बैठा है कि भजन नहीं करने देता है । है।

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