करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 254, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंतो एक बार कहीं राँजड़ी में शादी थी। उनकी रिश्तेदारी थी तो वो आ गये। माई ने कहा कि दो मिनट चलो। वो बोला कि नहीं, वो जादू - जड़ी वाला है, फँसा लेता है । माई ने कहा कि नाम नहीं लेना, चलो तो सही । कहा- अच्छा बाद में चलूँगा। इतने में माई आई, कहा कि बंदा आया है, थोड़ी देर में लाती हूँ। वो आया तो मैंने बात उठाई कि गुरु ज़रूरी है। क्योंकि माई ने पहले इशारा दे दिया था कि वो आ रहा है। मैंने कहा कि शास्त्र कह रहे हैं कि गुरु कि बिना गति नहीं है । वो बोले कि गुरु होता नहीं है जनानी (स्त्री) का। मैंने कहा कि बात सुन, किस ग्रंथ में यह बात लिखी है ? कहा कि उसका बंदा ही होता है। वो तो बस अपनी ही रट पकड़े हुए था । मैं जान गया कि आज निपट शठ और जिद्दी से पाला पड़ा है। मैंने कहा- एक बात बताओ, शिवजी का नाम सुना है? कहा—हाँ । मैंने कहा कि उनकी जनानी का नाम जानते हो ? कहा— पार्वती। मैंने कहा कि पार्वती का गुरु कौन है ? कहा- नहीं । मैंने बताया कि नारद जी हैं। शिवजी जैसी की जनानी को नारद जैसा गुरु करना पड़ा था तो आम आदमी क्या सोच रहा है ! फिर मैंने कहा कि राम जी का नाम सुना है ? कहा—हाँ । मैंने कहा कि उनकी जनानी का नाम जानते हो ? कहा- सीता जी । मैंने कहा कि सीता जी का गुरु कौन था, पता है ? कहा- नहीं। मैंने कहा कि सीता जी के गुरु थे- वशिष्ठ मुनि । राम जी ने नहीं कहा कि मैं ही हूँ तुम्हारा गुरु। वो आखिर में कह रहा है क जनानी का गुरु होता नहीं है । मैंने कहा कि तेरी बात तो वैसी ही है जैसे दिल्ली में एक बेकार बंदा था। उसकी स्त्री ने गाय रखी थी । दूध बेचकर अपने बच्चों को पालती थी। एक दिन बंदे ने ऐलान किया कि जो मुझे गीता का 18 अध्याय समझा देगा, उसे मैं यह गाय दान में दे दूँगा । माई ने कहा कि यह क्या जुल्म कर रहे हो; हम रोटी कहाँ से खायेंगे ? वो बोला कि मुझे कोई गीता का 18 अध्याय समझा नहीं सकता है, तू चिंता मत कर। वो बोली कि काशी जी के बड़े-बड़े विद्वान हैं; तुम ऐसा मत कहो; हमारे पास एक ही गाय हैं। वो बोला- अरे पगली ! परेशान क्यों हो रही है ! जब भी कोई समझायेगा तो मैं एक ही बात कहूँगा कि समझा ही नहीं। तो मैंने उस बंदे से कहा कि तेरी बात भी वैसी ही है। शास्त्र तो कह रहे हैं—