भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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ध्यान मूलम् गुरू रूपम् ॥

इसलिए जो ऐसी बात कह रहे हैं, वो शास्त्रों का ज्ञान नहीं रखते हैं। कल्पांतर तक साधना करते रहने पर भी गुरु के बिना परमात्मा को नहीं पाया जा सकता है। रामायण में तो गुरु के लिए बोला । कितना बढ़कर बोल दिया ।

गुरु बिन भव निधि तरई न कोई । हरि विरंचि शंकर सम होई ॥

शिवजी ने वृहस्पति को गुरु किया । ब्रह्मा जी ने अग्नि को गुरु किया।

राम कृष्ण से कौ बड़ा, तिन भी तो गुरु कीन ।

तीन लोक के नायका, गुरु आगे आधीन ॥

शास्त्रों को पढ़ने के बाद पता चलता है कि गुरु की ज़रूरत है । पर पाखण्डी गुरुवाद की तरफ नहीं जाने देता है।

गुरु को तजे भजे जो आना । ता मानुष को फोटक ज्ञाना ॥

जा गुरु ते भ्रम न मिटे, भ्रांति न जिव की जाय ।

सो गुरु झूठा जानिये, त्यागत देर लाय ।।