भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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फिर क्यों भटकाया जा रहा है ? यहाँ भी पहले से ही प्लैन है । इस बात पर संतों ने हमला किया और जान गँवानी पड़ी। उसके पास जाने की गाइडिंग मिल रही है क्या ? हाँ ।

कोई कहे तप है सारा । कोई कहे भाग्य अनुसारा।।

कोई कहे ज्ञान है भाई। कोई कहे कर्म बस आई ।।

फिर सूत्र क्या है उसके लिए - गुरु । कुछ कहते हैं कि देवी-देवताओं की भक्ति छोड़कर एक इंसान की भक्ति कर रहे हैं । ऐसा जाहिल ही कहेंगे । मैं अपवाद वाली बातें नहीं कर रहा हूँ। ऋग्वेद से लेकर महापुरुषों की वाणियों में सबमें गुरु की महिमा का वर्णन मिलता है। तो विरोध करने वाला सब गंदे काम भी कर रहा है । हम तो सच्चे सनातनी हैं। वो छल भी कर रहा है, माँस भी खा रहा है। वो हमारे लोगों को कहते हैं कि धर्म छोड़ दिया । विचार करो कि हम हक की कमाई खा रहे हैं, माँस नहीं खा रहे, शराब नहीं पी रहे । इतना कठिन जीवन कलिकाल में जी रहे हैं। तू कौन-सा धर्म वाला है, कौन - सा देवते वाला है । मैं भयभीत नहीं होता हूँ । कम-से-कम उदंड नहीं हूँ । कम-से-कम सही बोल रहे हैं न! आक्रांता होता नहीं हूँ। तुम्हें तो कहना चाहिए कि धन्य हो साहिब बंदगी वाले; इतना उत्तम जीवन है । उलटा कह रहे हो । वाह, हम बेधर्म हो गये जबकि खुद सब गंदे काम कर रहा है ।

निरंजन धन तुमरो दरबार ।।

रंग महल में बसें मसखरे, पास तेरे सरदार |

बेश्या ओढ़े खासा मलमल, गल मोतियन के हार ।

पतिव्रता को मिले न खादी, रूखा निरस अहार ।।

पाखंडी को जग में आदर, सच को कहें लबार ।

धूर धूप में साधु विराजे, भये जो भवनिधि पार ।।

निरंजन धन तुमरो दरबार ।।

साहिब फिर कह रहे हैं- कामी कबीर कलयुग आ गया, संत न पूजे क्रोधी आलसी, इनकी पूजा होय ।। कोय । इसलिए जो ऐसी बातें बोल रहे हैं, वो पाप-कर्म करने वाले हैं।