भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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उनकी बातों की तरफ ध्यान मत दो; अपना काम करते चलो। कुत्ते के भौंकने से हाथी पर बैठे आदमी को परेशान नहीं होना है। हम कहीं भी बदमाशी वाला काम नहीं कर रहे हैं । बाकी कोई भी यात्रा निकालता है तो रोड़ ब्लाक कर देते हैं । हमारे साथ तो कितना नाजायज़ व्यवहार किया गया । 12 आश्रम जला दिये गये । जहाँ भी हमारे पोस्टर देखते हैं, फाड़ देते हैं। ये सब काम बदमाशों वाले हैं। मैं कहता हूँ कि हम विचारवान् हैं । बस, इतना है कि हम दृढ़ हैं अपनी जगह। 24 साल नौकरी करते-करते मुझे सभी पंथों, जातियों के लोगों को पढ़ने का मौका मिला। मेरी बटालियन में सभी पंथ के लोग थे। तो देखा कि क्या कर रहे हैं। वहाँ भी एक महत्वपूर्ण काम किया। मैं पी.सी. इन्स्ट्रक्टर् भी रहा। यह काम आर्मी स्कूल में किया। जो जे. सी. ओ का कोर्स करने जाते हैं, वो वहाँ आते हैं। उन्हें पढ़ाना होता है । वहाँ भी समझा। वहाँ देखा तो उनमें कोई रूहानियत न मिली। बारीकी से देखा तो संत-मत की बात भी कर रहे थे, पर धीरे से अँधेरे में दारू भी पी लेते थे, मीट भी खा लेते थे, बाकी काम भी कर लेते थे, गाली भी बक देते थे। मैंने देखा कि इनका वाणी पर भी कोई कण्ट्रोल नहीं है, अन्य इंद्रियों पर भी नहीं है । मन पर कोई कण्ट्रोल ही नहीं है । आप भी तो अपने रिश्तेदारों में, पड़ौस में देखते होंगे तो पाते होंगे कि सभी पंथों से जुड़े लोग हैं; वो सभी काम करते हैं। वो आपकी भक्ति पर भी हमला करना चाहते हैं। क्योंकि ये सब काल के पंथ हैं। जो कबीर साहिब की बात कर रहे हैं, वो भी वास्तव में काल के ही पंथ हैं। क्योंकि यह भी निरंजन ने साहिब से विनती करके माँगा हुआ है कि वो उनके 12 पंथों को चलायेगा। इसलिए वहाँ ऊपर से बात तो कबीर साहिब की होती है, पर अन्दर से निरंजन वाला मामला होता है। मोहर कबीर साहिब की होती है, पर नाम निरंजन वाला होता है । यह सब निरंजन ने जीवों को भ्रमित करने के लिए माँगा ताकि सभी जीव अमर लोक न जा पाएँ। साहिब ने भी यह सोचते हुए कि जिसे सच्चा नाम मिलेगा, वो तो पार हो जायेगा और ऐसे में निरंजन का देश जल्दी ही खाली हो जायेगा और फिर 17 चौकड़ी असंख्य युग का राज्य करने का परम पुरुष का शब्द पूरा न हो पायेगा, उसकी यह बात भी मान ली। इसलिए इन पंथों के लोग भी अमर-लोक नहीं जायेंगे । इसलिए इनके लोगों में कोई बदलाव भी नहीं है और ये सब जगह भटक भी रहे हैं। क्योंकि इनके पास सच्चा नाम नहीं है । इनके

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