करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपास काया वाला नाम है, जो 52 अक्षर की सीमा में आ जाता है। पर आपको जो नाम दिया, वो विदेह नाम है, वो वाणी का विषय नहीं है। ...तो ये खुद तो भटके हुए हैं, आपको भी परेशान करने में लगे हुए हैं। अभी तक मैंने किसी के लिए कभी भी ऐसी प्लैनिंग नहीं की कि उसे नुक़सान पहुँचाया हो। कहीं भी जगह लेता हूँ तो लोग एकाग्रता से जानबूझकर तंग करते हैं । तो समाज ने आत्मसात् क्यों नहीं किया ? हम होना भी नहीं चाह रहे हैं। बाकी को मरोड़ कर शामिल कर लिया । हमने कहा कि हम अपना नियम नहीं छोड़ने वाले हैं। वो पाखंडी तबका सबल है । सब कुरीतियों में कैसे फँस गये ? उस पाखंडी तबके ने फेंक दिया। फिर हममें विवाद कहाँ है? मैं कह रहा कि हत्या नहीं मानना । वो जबरन हत्या मनवाना चाहते हैं। पूरे समाज में वहम - ही - वहम है। आदमी को विवश किया जाता है। सबका मुकाबला हमारे साथ है। क्योंकि किसी भी पंथ में जान नहीं रह गयी है। कौन-सा संतमत है ! सब काम तो कर रहे हैं । मेरा नामी करे तो दुबारा आने नहीं दूँगा । वो विवश करेंगे; भटकाकर ले जायेंगे। पर मेरा नामी यह सब नहीं कर रहा है। वो निराला हो गया है। | कभी-कभी आपको सोच आती होगी कि आप कहाँ पहुँच गये हैं.....ऐसी जगह, जहाँ की आपने कभी कल्पना भी नहीं की थी । एक आन्तरिक सकून मिला आपको। आप प्यारी रूहें हो गयीं । इतनी प्यारी रूहें कहीं नहीं मिलेंगी। आप अपने को देखते होंगे तो आपको भी प्रेम होगा अपने से । किसी से आपका लगाव नहीं रहा होगा। क्योंकि आप दुनिया से निराले हो चुके हो। आपका व्यक्तित्व शीतल हो गया होगा । दुनिया बेकाबू है, पर आपकी सब चीज़ें कंट्रोल में हैं। सच यह है कि आपको आत्मानन्द भी है । आप होश में हैं, दुनिया बेहोश है। मैं कितना कहूँ ! बस, आप हंस जैसे हो गये हैं, आप साधु हो गये हैं।