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करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पास काया वाला नाम है, जो 52 अक्षर की सीमा में आ जाता है। पर आपको जो नाम दिया, वो विदेह नाम है, वो वाणी का विषय नहीं है। ...तो ये खुद तो भटके हुए हैं, आपको भी परेशान करने में लगे हुए हैं। अभी तक मैंने किसी के लिए कभी भी ऐसी प्लैनिंग नहीं की कि उसे नुक़सान पहुँचाया हो। कहीं भी जगह लेता हूँ तो लोग एकाग्रता से जानबूझकर तंग करते हैं । तो समाज ने आत्मसात् क्यों नहीं किया ? हम होना भी नहीं चाह रहे हैं। बाकी को मरोड़ कर शामिल कर लिया । हमने कहा कि हम अपना नियम नहीं छोड़ने वाले हैं। वो पाखंडी तबका सबल है । सब कुरीतियों में कैसे फँस गये ? उस पाखंडी तबके ने फेंक दिया। फिर हममें विवाद कहाँ है? मैं कह रहा कि हत्या नहीं मानना । वो जबरन हत्या मनवाना चाहते हैं। पूरे समाज में वहम - ही - वहम है। आदमी को विवश किया जाता है। सबका मुकाबला हमारे साथ है। क्योंकि किसी भी पंथ में जान नहीं रह गयी है। कौन-सा संतमत है ! सब काम तो कर रहे हैं । मेरा नामी करे तो दुबारा आने नहीं दूँगा । वो विवश करेंगे; भटकाकर ले जायेंगे। पर मेरा नामी यह सब नहीं कर रहा है। वो निराला हो गया है। | कभी-कभी आपको सोच आती होगी कि आप कहाँ पहुँच गये हैं.....ऐसी जगह, जहाँ की आपने कभी कल्पना भी नहीं की थी । एक आन्तरिक सकून मिला आपको। आप प्यारी रूहें हो गयीं । इतनी प्यारी रूहें कहीं नहीं मिलेंगी। आप अपने को देखते होंगे तो आपको भी प्रेम होगा अपने से । किसी से आपका लगाव नहीं रहा होगा। क्योंकि आप दुनिया से निराले हो चुके हो। आपका व्यक्तित्व शीतल हो गया होगा । दुनिया बेकाबू है, पर आपकी सब चीज़ें कंट्रोल में हैं। सच यह है कि आपको आत्मानन्द भी है । आप होश में हैं, दुनिया बेहोश है। मैं कितना कहूँ ! बस, आप हंस जैसे हो गये हैं, आप साधु हो गये हैं।

पुस्तक सूची

हिन्दी में 1. परा रहस्या 35. नाम बिना नर भटक मरे 4. सद्गुरु चालीसा 3. पावन प्रार्थनाएँ 2. मासिक पत्रिका सत्यकेतु 5. वार्षिक डायरी 38. न्यारी भक्ति 36. रोगों की पहचान 37. यह संसार काल को देशा 39. साहिब तेरी साहिबी सब घट रही समाय 6. सद्गुरु भक्ति 7. कहाँ से तू आया और कहाँ तुझे जाना रे? 8. सत्संग सुधारस 9. नाम अमृत सागर 15. गुरु सुमिरै सो पार 16. तीन लोक से न्यारा 10. अमृत वाणी 12. चल हंसा सतलोक 14. मूल नाम गुप्त है, जाने बिरला कोय 17. सेहत के लिए ज़रूरी 18. सहजे सहज पाइये 19. रोगों से छुटकारा 11. सद्गुरु नाम जहाज़ है 13. कोटि नाम संसार में तिनते मुक्ति न होय 41. आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में 47. जीवड़ा तू तो अमर लोक का पड़ा काल 48. मुझे है काम 'सद्गुरु से 40. जाप मरे अजपा मरे अनहद भी मर जाए 42. सुरति समानी नाम में 44. निन्दक जीवे युगन युग काम हमारा होय । 45. निराले सद्गुरु 46. कुँजड़ों की हाट में हीरे का क्या मोल 43. सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल 49. जेहि खोजत कल्पो भये घटहि माहिं सो 50. आत्म ज्ञान बिना नर भटके 51. बिन सतगुरु बाँचे नहीं कोटिन करे उपाय जगत रूठे तो रूठन दे' मूर बस आई हो 20. सद्गुरु महिमा 21. भक्ति के चोर 52. अँधी सुरति नाम बिन जानो 53. सत्यनाम निज औषधि सद्गुरु दई बताय 22. अनुरागसागर वाणी 54. सेहत संजीवनी 23. भक्ति सागर 55. भक्ति दान गुरु दीजिए 25. सत्य नाम के सुमरते उबरे पतित अनेक 26. काग पलट हंसा कर दीना 27. कस्तूरी कुण्डल बसै मृग खोजे बन माहिं 28. गुरु पारस गुरु परस है 30. शीश दिये जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान 33. मैं कहता हूँ आँखिन देखी 29. गुरु अमृत की खान 31. मूल सुरति 32. भृंग मता होय जिहि पासा, सोई गुरु सत्य 34. गुरु संजीवन नाम बतावे 24. हरि सेवा युग चार है, गुरु सेवा पल एक धर्मदासा 59. मुक्ति भेद मैं कहौं विचारी 61. सुरति का खेल सारा है 56. मन पर जो सवार है ऐसा 58. रोग निवारक 60. "तेरा बैरी कोई नहीं 62. सार शब्द निरअक्षर सारा 63. करूँ जगत से न्यार 57. सत्यनाम है सार बूझौ सन्त विवेक करि तेरा बैरी मन" ऐसा विरला कोई