करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 42, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंकै मोहि देहु लोक अधिकारा ।
कै मोहि देहु देश इक न्यारा ॥
निरंजन ने कहा “मैं इतने से खुश नहीं हूँ । अब कृपा करके या तो इस अमर-लोक का राज्य ही मुझे दे दो या फिर एक अलग से न्यारा देश दो, जिस पर मेरा पूरा अधिकार हो, जहां मैं स्वतन्त्र रूप से बिना किसी रोक- टोक के अपना कार्य कर सकूँ ।" परम-पुरूष ने तब निरंजन से कहा कि तुम्हारे बड़े भाई कूर्म के पास पाँच तत्त्व का बीज (जो सूक्ष्म रूप में था) है। तुम उसके पास जाकर प्रार्थना करना और पाँच तत्त्व का बीज ले लेना । उससे तुम शून्य में तीन - लोक बनाना। जाओ! तुम्हें 17 चौकड़ी असंख्य युग का राज्य देता हूँ । निरंजन कूर्म जी के पास पहुँचा, लेकिन कूर्म जी से प्रार्थना नहीं की, और बल से पाँच तत्त्व का बीज उसी प्रकार उनसे छीन लिया, जैसे किसी के शरीर से खून खींचकर निकालते हैं । कूर्म जी शांत थे, उन्होंने सोचा कि यह कौन शैतान यहाँ आ गया है ! कूर्म जी ने तब परम- पुरूष से पुकार की, कहा- यह किस शैतान को यहाँ भेज दिया है ! इसने तो मेरे साथ बल का प्रयोग करके पाँच तत्त्व का बीज छीना है। परम-पुरूष ने कूर्म जी से कहा कि तुम शांत रहो, यह तुम्हारा छोटा भाई है, इसे माफ कर दो । लोकिन परम-पुरूष ने सोचा कि यह कैसा निरंजन उत्पन्न हुआ है ! पाँच तत्त्व का बीज लेकर निरंजन ने उससे पाँच तत्त्व (जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश ) बनाए । जिस तरह कुम्हार मिट्टी से तरह -2 की वस्तुएँ बनाता है, उसी तरह निरंजन ने भी इन पाँच तत्त्वों से 49 करोड़ योजन पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र, तारे, सप्त-पाताल, सप्त- लोक, सब बना दिया । ऐसे शून्य में कई दिन रहा, लेकिन जीव नहीं थे, इसलिए यह निर्जीव सृष्टि थी । निरंजन ने सोचा कि यदि जीव ही नहीं है तो फिर सृष्टि का क्या लाभ ! अतः उसने पुन: 64 युग तक परम-पुरुष का ध्यान किया। परम-पुरूष ने पूछा कि अब क्या चाहिए ? निरंजन - -
दीजै खेत बीज निज सारा ।।