करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 59, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंसभी जुट जाते हैं कार्यकत्ता । बुद्धि एक बार आदेश दे दे कि चाँटा मारना है, हाथ तैयार हो जायेंगे। यह काम हो जायेगा। पाँच चीजें विशिष्ट हैं । पाँचों इसमें बड़े मंत्री हैं। इनके सैकेट्री हैं, पूरा परिवार है । जो कहा, वो करना-ही- करना है, नहीं तो शांति नहीं है । चाहे अनचाहे करना ही है, क्योंकि मन का आदेश है। मोह आया। मोह का मिनीस्टर ब्रेन में बैठेगा, कहेगा कि बेटे के लिए यह कर, वो कर । आदमी सोचता है कि तारे तोड़ लाऊँ । मिनीस्टरों ने कार्यकर्त्ताओं को अधिकार दे रखे हैं । इस तरह इनके पास हथियार हैं, दिख नहीं रहे हैं । साहिब कह रहे हैं-
तीन लोक में मनहिं विराजी । ताहि न चीह्नत पंडित काजी ॥
तीन - लोक में मन विराजमान है । मन जो चाहता है, वो करता है । यही दुश्मन बना देता है। इसकी तह में जायेंगे तो यह सेना बहुत है। मन की सेना बड़ी तगड़ी है। इसलिए साहिब वाणी में एक बात कह रहे हैं—
बहु बंधन ते बांधिया, एक विचारा जीव ॥
जैसे सैकेट्री हैं, तहसीलदार हैं, कमीश्नर हैं, थाना है, चौकियाँ हैं, फिर बाज़ारों में सिपाही खड़े हैं। पूरे एरिए को पकड़ा है। इस तरह मन तीन- लोक का राजा जो है । यह इसे सही में मिला है। पॉवर मिला है। काम, क्रोध आदि भी इसी के हैं । प्रथम प्रवृत्ति मन को, महामोह अहंकार । दूजी प्रवृत्ति उपजो, काम
प्रबल जग में ॥
ये दुर्गुण सबमें हैं। काम, क्रोध, मोह, लोभ, दंभ, अहंकार आदि सबमें हैं। रूप का भी मद है। यदि पढ़ा लिखा है तो उसका भी मद आ जाता है । फिर आगे इनके परिवार भी हैं । मोह की स्त्री है - प्रिया । यह सबके अन्दर है । कोई भी चीज़ प्यारी लगेगी। एक महात्मा किसी को प्रिय नहीं मानता है । वो जानता है कि क्या है । फिर इसका बेटा है घमंड । नूह है ममता। यानी मेरा-मेरा। यह आत्मा नहीं है । बहुत बड़ा झमेला अन्दर में है । चश्म दिल से देख तू, क्या क्या तमाशे हो रहे । दिल सतां क्या क्या हैं
तेरे दिल सताने के लिए ॥
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