करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंथोड़ा चिंतन करें तो लगेगा कि चल रही है । जिस भी पार्टी की सत्ता होती है, उसी का हुकुम चलता है। कैबिनेट में बड़े मिनीस्टर होते हैं। बिजली के महकमें के लिए अलग मंत्री है, रक्षा के लिए अलग मंत्री है। लगता है कि पूरी हुकूमत चला रहे हैं। क्या इस तरह मन की हुकूमत हमारे अन्दर चल रही है ? लग रहा है कि हम सबके अन्दर एक ऐसी सत्ता की हुकूमत चल रही है, जो हमेशा हमारे विरुद्ध चल रही है। स्कूलों में सरकार की हुकूमत है। वो चाहें तो स्कूल 7 बजे खुलेंगे, वो चाहें तो 8 बजे खुलेंगे। इस तरह दुनिया में निरंजन की हुकूमत चल रही है। वो कैसे कर रहा है हुकूमत ?
मनहिं निरंजन सबपर छाए ॥
उसकी ताक़त है कि उसके हर आदेश का पालन होता है। आख़िर कुछ जान सकते हैं कि कैसे चलता है ? वो हरेक चीज़ करवा सकता है । कैसे ? जैसे सी.एम. का शासन चल रहा है। मन की हुकूमत कैसे चलती है ? यह ब्रेन को संदेश देता है । जितने भी मिनीस्टर हैं, सी. एम. के अधीन हैं । इस तरह मन भी बड़े मिनीस्टर हैं । मन ने कहा कि फ़लाने को तमाचा मारो। यह आज्ञा कैसे पालन हुई ? मन ने यह चीज़ बुद्धि को बताई । बुद्धि क्या है ? यह बुद्धि भी मन है। उसने विचार किया कि गाली बकी थी इसने । बुद्धि ने क्रोध को बुलाया, कहा कि सुनो, यह काम करना । गुस्से का मिनीस्टर है - क्रोध । संदेश दिया। उकसाना ज़रूरी था वहाँ । नहीं आता क्रोध तो नहीं मारना था । इनका कोई कसूर नहीं है। पुलिस वालों को आदेश मिला कि मारो नहीं उनका कसूर नहीं है, आदेश का पालन कर रहे हैं । इस तरह इनका कसूर नहीं है । इन्होंने आदेश माना। इसके भी एस. पी. हैं । इन्द्रियों पर देवता हैं; सब इसकी बात मान रहे हैं। मन ने कहा कि आम खाना है । हरेक बात का पालन होता है । मन ने कहा कि धन चाहिए। क्या कर रहा है ? बॉस है, किनारे बैठकर नेटवर्क चला रहा है। माफिया है । तभी कह रहे हैं- तेरा बैरी कोई नहीं,
तेरा बैरी मन ॥
जीव के संग मन काल रहाई। अज्ञानी नर जानत नाहीं ॥
धन चाहिए। ऐसे नहीं आयेगा । बुद्धि ने लोभ को कहा – हाय पैसा, हाय पैसा। दिल में समा जायेगा। सरकार ने कहा कि फ़लाना काम करना है ।