करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबीमारियाँ बढ़ रही हैं तो कारण है कि वातावरण में प्रदूषण, खान- पान में त्रुटियाँ, रहन-सहन में त्रुटियाँ और टेंशन। ध्यान रखें कि टेंशन हरेक बीमारी को बुलाती है। हार्ट, फेफड़े, दिमाग़ आदि सब पर असर पड़ता है । टेंशन से हार्ट फेल हो सकता है, मस्तिष्क संबंधी रोग हो सकते हैं । जब आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो रही है तो टेंशन है। तो समाज में पाप बढ़ गया है तो इसका कारण क्या है ? कोई जिम्मेदार तो होगा न! हरेक गलती के लिए कोई जिम्मेदार ढूँढ़ा जाता है। एक्सीडेंट होता है तो जिम्मेदार ढूँढ़ा जाता है । क्यों हुआ, इसका कारण ढूँढ़ा जाता है । क्या सिग्नेल नहीं था या स्टेशन मास्टर की ग़लती है, यह देखा जाता है। एक्सीडेंट के पीछे क्या कारण रहा, यह खोजा जाता है । फिर उसे दण्डित किया जाता है या सुधार लाया जाता है। इस तरह पाप का कारण ढूँढ़ा जाना चाहिए। आज धरती पर समाज में पाप दीख रहा है तो जिम्मेदार धर्मक्षेत्र है । मानव छल कर रहा है तो सरकार की जिम्मेदारी नहीं है । सबसे पहले धर्म की जिम्मेदारी है । आप देखें कि पहले लोग पाप नहीं कर रहे थे । पहले धर्मवेत्ताओं ने अच्छी तरह से समझा दिया था। इसलिए लोग पाप नहीं कर रहे थे । इसलिए वे छल आदि नहीं कर रहे थे । यदि थे तो बहुत कम थे। आज कई शातिर तरीके से अपराध कर रहे हैं। आदमी पाप-पुण्य को नहीं समझ पा रहा है। भक्ति तंत्र फेल हो रहा है। इसलिए ध्यान देने की ज़रूरत है कि भक्ति - क्षेत्र कैसे ख़राब हो गया। भाई-भाई को मारने के लिए तैयार है । जो चरित्रवान् है, उसे बुद्ध समझा जा रहा है; जो शराब नहीं पी रहा है, उसे बेवकूफ़ माना जा रहा है, उसे हीन भावना से देखा जा रहा है; जो छल नहीं कर रहा है, उसे पिछड़ा हुआ माना जा रहा है; जो हिंसा नहीं कर रहा है, उसे डरपोक माना जा रहा है। यानी छल, हिंसा आदि का ग्राहक बढ़ता जा रहा है । मन काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी पाँचों हाथों से सबको मरोड़े जा रहा है। बिना नाम के सब मन-माया के जाल में पिस रहे हैं। यह पूरी दुनिया मन की है । मन इस संसार का राजा है, इसलिए उसी की हुकूमत चल रही है । जिसकी हुकूमत होती है, उसी का राज होता है, उसी का हुकुम चलता है। देखते हैं कि दुनिया में काल - पुरुष की हुकूमत चल रही है क्या ?