करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 61, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंएक मनोवैज्ञानिक मिला; वो एक ही सवाल में ढेर हो गया। मैंने कहा कि मन क्या है ? कहाँ रहता है ? जब पूरी बात हुई तो कहने लगा कि महाराज, जो बात आप कर रहे हैं, वो आजतक किसी स्लेबस में नहीं है । मैं ड्राइवर पर भी नज़र रखता हूँ। चलते-चलते लड़की पर नज़र टिके तो टोक देता हूँ। क्योंकि आदत बन गयी है यह । कभी फ़ालतू हार्न बजाए तो टोकता हूँ, मारता भी हूँ। मैं कहता हूँ कि मेरी गाड़ी में यह हरकत कर रहा है। चाँटा भी मारता हूँ। क्योंकि उसकी आदत बन गयी है।
रहिमन लाख भली करो, औगुणी अगुण न जाय ॥
ये सब ताक़तवर हैं। वेदों की रचना करने वाले वेदव्यास जी भी पुत्र के शोक में रो रहे थे। पेड़ ने कहा तब होश आया। क्रोध का बेटा है- अविचार । यानी विचार नहीं करना है । जब भी क्रोध आता है तो विचार नहीं करने देता है । अन्दर में दैवी गुणों को दबा कर रखता है । इसकी बहू है- भूल । कहते हैं कि भूल गया । यह बहू है । लोभ का परिवार भी है। तृष्णा इसकी स्त्री है। लोभ से इंसान पूरे पाप करता है। झूठ इसकी बहू है । पाप पुत्र है ।
अस असुर घट में बसे, कैसे रहे कुशल ॥
इस तरफ किसी का चिंतन नहीं है । मन का नेटवर्क बहुत है । बड़े- बड़े नहीं समझ पा रहे हैं। तभी साहिब वाणी में कह रहे हैं-
सय्याद के काबू में हैं सब जीव विचारे ॥
सही में समस्त जीव शैतानी ताक़तों के हाथ में हैं। छुटकारा नहीं मिल रहा है। चाहे-अनचाहे उसका हुकुम चल रहा है। यह आदेश हमारे शरीर में घूमता है। विचार करने पर भी पता चलता है कि ऐसी ताक़तों का हुकुम चल रहा है। ये कौन है ? मन । साहिब वाणी में कह रहे हैं-
मनहिं आहे काल कराला । जीव नचाए करे बेहाला ॥
इसका मतलब है कि हम सबके अन्दर एक ऐसी सत्ता काम कर रही है, जिसका हुकुम आत्मदेव को मानना पड़ रहा है। देखते हैं कि हमारे नुक़सान में है क्या ? साहिब की बात में वज़न लग रहा है कि सभी किसी ऐसी शैतानी ताक़त के हाथ में हैं, जो क्रूर हैं, हिंसक हैं। उदाहरण के लिए मन का