भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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हर एक आदेश पालन किया जाता है । जो भी चाहता है, करवा लेता है। इस मन की हुकुमत बहुत बड़ी है। बहुत सेना है । बहुत ताक़त है इस मन में। मन एक संदेश देता है। सभी इंद्रियाँ इस आदेश का पालन करती हैं। मन के चार रूप हैं- मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार । चारों ये मन के रूप हैं । यह बुद्धि आदेश देती है कि फ़लाने को तमाचे लगाने हैं तो हाथ, शरीर, आत्मा सभी उस मन की आज्ञा का अनुकरण करते हैं । मन के मिनीस्टर हैं— काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, दंभ। इनकी बड़ी सेना है । जैसे शासन संचालित होता है, ऐसे ही मन का पूरा नेटवर्क है । जो ऊपर से संदेश आया, नीचे तक सभी उस आदेश का पालन करते हैं । इस तरह मन के आदेश का सभी पालन करते हैं । उदाहरण के लिए बुद्धि ने कहा कि इसने हमें अच्छा नहीं कहा, इसे मारो। तो आदेश देती है। हाथ मारने के लिए तेज़ी से चल पड़ते हैं । फिर यह काम कैसे होता है ? क्रोध के साथ हिंसा भी आ जाती है । हिंसा क्रोध की पत्नी है । अविचार उसका पुत्र है और घृणी उसकी बहू है। परिवार इतना ख़तरनाक है। हिंसा रानी कहती है कि मज़ा आ रहा है, मारो | इतना आनन्द आता है कि विवेक नहीं होता है । अविचार उसका पुत्र है । जब भी क्रोध आता है लगता है कि शांति तभी मिलेगी, जब मारेंगे। गुस्से में कभी गाली बकता है । शांति के लिए बकता है । सकून मिलता है । यह कैसा सकून था कि किसी को चोट पहुँचाने से शांति मिली! यह हिंसा क्रोध की पत्नी थी। तब अविचार भी आ जाता है, कुछ नहीं सोचने देता है। वो कहता है कि लगे रहो । फिर घृणा आ जाती है। परिवार ख़तरनाक है । देखते हैं तो हरेक इंसान में ये चीजें मिल रही हैं । इसका मतलब है कि मन का नेटवर्क बहुत बड़ा है। इस तरह इसका मंत्री लोभ है। जब भी धन की आकांक्षा होती है, बुद्धि लोभ को आज्ञा देती है— उठ! लोभ उठ जाता है । उसकी पत्नी है— तृष्णा । वो भी खड़ी हो जाती है, कहती है—हाय पैसा ! तृष्णा होती है तो शांति नहीं मिलती है। उसका बेटा है- - पाप । पुत्र भी ख़तरनाक है । वो कभी भी आदमी को सोचने नहीं देता है। वो पाप ही करवायेगा। यह पूरी मन की फौज है । आत्मदेव पूरा इनका पालन कर रहा है । इस तरह कामदेव है । जब मन चाहता है तो जीव को उलझाता रहता है। जब काम आ जाता है तो बुद्धि भी वैसी ही हो जाती है । विषय-विकारों की तरफ ध्यान हो जाता है। काम की पत्नी है— रति । रतिक्रिया संभोग क्रिया