करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 63, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंको कहते हैं । इसका परिवार भी बड़ा ख़तरनाक है । इन सबने मिलकर जीव को घेरा है।
इन सब मिल जीवहि घेरा । बिना परिचय भया यम को चेरा॥
फिर मोह |
मोह सकल व्याधिन को मूल । ताते उपजत बहु विधि सूला ॥
यह क्या है मोह ? जब आदमी में मोह आता है तो अनर्थ कार्य करने लगता है। मोह की पत्नी है, पूरा परिवार है। इसकी वधु है—लोलुपता । पुत्र है— अज्ञान। मोह आ जाता है तो लगता है कि यह मेरा ही है। मोह बड़ी चीज़ों का है। बिलकुल भी मन एक्टिव हो रहा है। जिस भी दल की सरकार है, हुकूमत चल रही है। मुखिया जो आदेश दे रहा है, लागू हो रहा है। मन जो भी आदेश दे रहा है, लागू हो रहा है। राक्षस की सेना होगी तो ख़तरनाक ही होगी। वो भी ख़राब होगा। ये मनुष्य के अन्दर रहते हैं, अपना काम कर रहे हैं । ये सब शक्तिशाली हैं, एक से बढ़कर एक हैं । आत्मदेव आज्ञा पालन के लिए बाध्य है। अब सवाल उठा कि क्यों कर रहा है ? ये इससे ताक़तवर हैं क्या ? नहीं, अज्ञान के कारण। अज्ञान यह कि अपने को मन समझ लिया, बुद्धि समझ लिया। इसलिए मन नचा रहा है । मन का हथियार अज्ञान है । पता नहीं चल रहा है कि कौन कर रहा है । अज्ञान से सब हो रहा है । पर किसकी ताक़त से हो रहा है ? आत्मा की । आत्मदेव अनुकरण न करे तो कुछ नहीं हो सकता है। साहिब ने कहा—
आपा को आपा ही बंध्यो ॥
यह बड़ा सतर्क किया है । अपनी शक्ति से अपने को बाँधा ।
जैसे स्वान काँच मंदिल मां, भरमत भूँकि परयो ॥
जैसे काँच के महल में रहने वाला कुत्ता शीशे में दिखने वाले अपने ही प्रतिबिंब को दूसरा कुत्ता समझकर भौंकता भौंकता मर जाता है। सच यह है कि अपनी ही परछाईं को उसने दूसरा कुत्ता समझा ।
जैसे नाहर कूप में, अपनी प्रतिमा देख परयो ॥
जैसे शेर कुँए में अपनी परछाईं को देख दहाड़ा । ध्वनि प्रतिध्वनि होती है। उसे कोई नहीं मारा। दूसरा शेर समझकर वो कूद पड़ा। यानी अपनी ताक़त से अज्ञान के कारण मारा गया। इस तरह अपने को बंधन में डालने