भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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के लिए आत्मदेव अज्ञानवश स्वयं अपनी ही उर्जा लगा रहा है। आत्मा के लिए तो शास्त्रों में कहा कि नाश नहीं होता, अजर-अमर है । वासुदेव कृष्ण ने जब कहा कि मैं गीता का संदेश पहले भी सूर्य को दे चुका हूँ। अर्जुन ने कहा कि आप तो इसी युग में हुए हैं और सूर्य पुरातनकाल से है, फिर यह कैसे संभव है? तब वासुदेव ने कहा कि तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं, पर अन्तर यह है कि वो सब तुझे याद नहीं हैं, पर मुझे याद हैं।

यानी आत्मा ने कई शरीर धारण किये। सभी छूट गये ।

आखिर यह तन खाक मिलेगा, कहाँ फिरत मगरूरी में ॥

यह भी छूट जायेगा। यह पूरा - पूरा सच है । इसके बाद भी कैसा अज्ञान है कि सच मान रहे हैं। क्योंकि मोह आ जाता है तो सच लगता है । मोह के कारण आत्मा भी मेरा-मेरा कहने लगी, लोभ के कारण पाप करने लगी । यह आत्मा का स्वभाव नहीं है। यानी वर्तमान में बिना नाम के आपमें आत्मा का स्वभाव मिल नहीं रहा है। | किसी को भी जानने का प्रयास करते हैं तो दो चीज़ों से। एक तो शारीरिक नाक-नक्शे से और दूसरा स्वभाव से । नाक, आँख आदि देखकर पहचाना। यह याददाश्त में रखा हुआ है कि उसका रूप ऐसा है । दूसरा स्वभाव से जानता है कि कैसा है। पूछा जाता है कि फ़लाना कैसा है ? क्यों पूछा जा रहा है ? कर्म से कैसा है, स्वभाव से कैसा है, क्रिया से कैसा है, यह पूछा जा रहा है। कहता है कि अच्छा है । धोखा नहीं दे रहे हैं, परमार्थी हैं, पीड़ा नहीं दे रहे हैं तो अच्छा है । आत्मा को भी देखते हैं । आत्मा कहाँ है ? स्वभाव भी देखते हैं। ढाँचा तो बड़ा निर्मल है। यह स्त्री भी नहीं है, पुरुष भी नहीं है। पंच भौतिक तत्व भी नहीं है । यानी वायु भी नहीं, आग भी नहीं । परमात्मा का अंश है । बहुत निर्मल है। यह छोटी भी नहीं है, बड़ी भी नहीं है । अजर, अमर है । इसका ढाँचा भी निराला है । कमती - बढ़ती भी नहीं है । कभी भी नाश नहीं होती। मजबूत है । नित्य है । इसका बाहरी स्वरूप बड़ा ज़ोरदार बनावट भी मजबूत है । तत्वों से परे है । जहाँ भी तत्व हैं, वहाँ विनाश है। पृथ्वी का विनाश जल कर देता है, जल का विनाश आग कर देती है, आग का विनाश हवा कर देती है और हवा का विनाश आकाश कर देता है । पर आत्मा इनसे परे है। अब आत्मा के गुण देखते हैं । इसे आत्मदेव कहते हैं, कोई राक्षस