भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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रूप ने मोहित कर लिया । इसे मामूली नहीं समझना ।

तब रति देख दीन है गयऊ। विनती करत विषय तन भयऊ॥

जब रति देखि दीन है आई । विनती करी तब लखि पाई ॥

सृष्टि न होय न चलै संसारा । महा रुद्र तुम करहु विचारा ॥

जब शिव देख दया मन लावा । ता दुख मेटन मन में आवा ॥

तब ति जानि बहुरि निर्मयऊ । अंगहीन सो अति बलि भयऊ ॥

शिव महापुराण में भी कथा आती है। तो—

बहुरि काम चले समुहाई । तेतिस क्रोड किये वशि जाई ॥

काम बान शर धरि लीन्हा । जीतन चले सो आपु वशि कीन्हा ॥

इंद्रसेन जब गयी सब हारी । इंद्रहु की गई बुद्धि मति मारी ॥

जबहिं इंद्र काम वश भयऊ । गौतम नारि छलन तब गयऊ ॥

जबते चित में चितये पापू । सहे उग्र गौतम का शापू ॥

सहस्र भग ताकहँ भयऊ। काम बान कर फल यह ठयऊ॥

काम चंद्र पर चितवे जबहीं । जाइ हरे गुरुपत्नी तबहीं ॥

इस काम ने तैतींस करोड़ देवताओं को भी अपने वश में किया हुआ है। उनके राजा को ही लेते हैं। राक्षसों से युद्ध में हार जाने पर इंद्र का दिमाग़ ख़राब हो गया और वो गौतम रिषी की पत्नी अहिल्या के पास पहुँच गया। देखा न, देवताओं के राजा का यह हाल हो गया ! फिर आम आदमी की क्या बात करें ! आदमी क्या, अन्य देवताओं की बात भी क्या की जाए ! देवताओं के राजा का यह हाल हो गया। कोई अच्छा हो तो कहते हैं कि देवता समान है । अब देवताओं के राजा का यह हाल है कि पराई स्त्री के पास पहुँच गया तो क्या कहा जाए! गौतम ऋषि ने शाप दे दिया, कहा कि जाओ, सहस्र भग हो जाएँ शरीर में। उसके शरीर में हज़ार भग द्वार हो गये, मुँह में, टाँगों में ....... सब जगह। जब चंद्रमा पर काम की नज़र पड़ गयी तो वो गुरु- पत्नी के पास पहुँच गया। साहिब कह रहे हैं-

ऐसो असुर घट मों बसे, सुनहु हो धर्मदास ॥

घट परिचय जाने बिना, सबका भया विनाश ॥

तन मन लज्जा ना रहै, काम बाण उर साल॥

एक काम सब बसि किये, सुर नर मुनि विहाल ॥

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