करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 90, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंज्ञानी मोर अपरबल ज्ञाना । वेद किताब भरम हम माना । ।
इनको माने सब संसारा । कलि में गंगा मुक्ति द्वारा।।
देही दान से उतरे पारा। ऐसे सुमृत कहे विचारा ।।
यह विधि जग जीव भुलाहीं । जरा मरन सब बंध बंधाहीं ।
सूतक पातक वेद विचारा। पूछ वेद से करहि संहारा ।।
एकादशी मुक्ति को भाई । योग जग्य करवे अधिकाई ॥
कहा कि मैंने वेद आदि के द्वारा कर्मकाण्डों में जीव को उलझाया हुआ है। सब इन्हीं को मानते हैं। वेद में निरंजन ने अपनी ही बात की है । उसी ने बनाए हैं वेद । इसलिए साहिब का रहस्य उसमें नहीं दिया। तो उसने कहा कि कोई तुम्हारी बात नहीं मानेगा, इसलिए मत जाओ दुनिया में । साहिब ने कहा—
सुनहु काल ज्ञान की संधि । छोरो जीव सकल की फँदी ।।
जब निज बीरा हंसा पावै । योग बरत तप सबै नसावै ।।
वेद किताब की छोड़े आसा । हंसा करे शब्द विस्वासा ।।
ताके निकट काल नहिं आवै । निज बीरा जो सुरत लगावै ।।
जोग बरत पतहू है छारा । अद्भुत नाम सदा रखवारा ।।
कहा कि जिसे नाम मिल जाएगा, उसका सारा वहम अन्दर से धुल जाएगा। वो फिर कर्मकाण्डों को छोड़कर नाम में ही विश्वास करेगा । नाम सदा उसकी रक्षा करेगा । काल उसके निकट नहीं आ पायेगा । नोट- सत्यपुरुष का पाँचवां पुत्र निरंजन है जिसको निराकार, निरंजन, नारायण, अथवा मन आदि नामों से जाना जाता है जिसे संसारिक लोग राम, ब्रह्मा, आदि निरंजन, कादर, क्रीम, प्रमेश्वर, प्रमात्मा, हरी, हरि, अद्वैत, भगवान, तथा अलख निरंजन आदि नामों से याद करते हैं । इसी निरंजन के ग्रंथ पोथियों में हज़ारों नाम लिखे गए हैं।