करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 89, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाहिब ने कहा कि हे निरंजन, तब इनके पास सच्चा नाम नहीं था, तूने खा लिया। अब मैं परम पुरुष का बड़ा जबरदस्त नाम दूँगा और तुम्हारा जोर अब जीव पर नहीं चलने दूँगा । पाप और पुण्य का ज्ञान भी जीव को अन्दर से होता जायेगा। नाम उनकी रक्षा करेगा और सब बंधनों से छुड़ाकर अमर - लोक ले जायेगा।
निरगुन काल तब बोले बानी । उरझे जीव सकल जमखानी।।
कैसे के तुम शब्द पसारो । कौने विधि तुम जीव उबारो ।।
ऐसे जीव सकल हैं करनी । कैसे पहुँ चैं पुरुष की सरनी।।
जग में जीव क्रोध विकारा । कैसे पहुँचै पुरुष के द्वारा ।।
निरंजन ने कहा कि मैंने काम, क्रोधादि विकारों में जीव को फँसा दिया है। फिर वे परम पुरुष के लोक में कैसे पहुँचेंगे। इस पर भी यम के 14 दूत मैंने प्रत्येक शरीर में बिठाए हुए हैं। तुम उन्हें कैसे निकालोगे ? कहा कि जीव बड़ा गंदा हो गया है, तुम्हारी बात कोई नहीं मानेगा ।
ज्ञानी कहे करहु वरियारा। हमतो कीन्ह सकल निरवारा ।।
जोई ज्ञानी होय हमारा। काम क्रोध ते होय नियारा ।।
तृस्ना लोभहि देई बहाई । विषै जन्म सब दूर पराई ।।
नाम ध्यान बल हंसा घर जाई । क्या रे काल तुम करो बड़ाई ।।
साहिब ने कहा कि जिस शरीर में नाम दे दूँगा, वहाँ तेरा जोर नहीं चलेगा। वहाँ काम, क्रोध आदि कुछ नहीं कर सकेंगे और वो जीव निर्मल हो जायेगा। तुम उस जीव को छू भी नहीं पाओगे और वो हंस रूप होकर अपने देश चला जायेगा |
कहे निरंजन सुनो हो ज्ञानी । कथि हो ज्ञान तुम्हारी बानी ।।
युगत महात्म सबै बताऊँ । तुम्हारा नाम ले पंथ चलाऊँ ।।
अब निरंजन अपनी जगह पर आया, कहा कि मैं भी तुम्हारा नाम लेकर अपना पंथ चलाऊँगा यानी नकली नाम का प्रचार करूँगा । आज आप देखें तो सभी सद्गुरु बने हुए हैं, सभी संत बने हुए हैं, सभी नाम दे रहे हैं। यह सब निरंजन का ही खेल है। बात वे निरंजन की ही कर रहे हैं और मोहर संतों की लगा रखी है। तो निरंजन ने यह भी कहा