भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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यह काम पल में किया। फिर तीसरा, एक सुरक्षक भी साथ हो गया। हर पल के लिए एक ताकत साथ में दे देता है । तभी तो कहा— जब मैं था तो गुरु नहीं, अब गुरु हैं मैं नाहीं ।

प्रेम गलि अति साँकरी, तामें दो न समाहिं ॥

जो आप अपने को महसूस कर रहे हैं, यही धोखा है। यह आपा ही आसक्त है। यह पूरा खत्म हो जाता है । क्यों ? गुरु समाना शिष्य में, शिष्य लिया कर नेह । बिलगाए बिलगे नहीं, एक रूप दो

देह ॥

गुरु आपको अपने समान कर देगा । आप अपनी दुनिया ही भूल जाओगे । साहिब की वाणी में वजन है—

नाम पाय सत्य जो बीरा, संग रहूँ मैं दास कबीरा ॥

सच मानना, अभी बार- बार चेताकर कह रहा हूँ, जब यहाँ से चला जाऊँगा तो दुनिया पछताएगी, क्योंकि सत्य है - जो वस्तु मेरे पास है, ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है।

पलटू कहै साँच कै मानो । और बात झूठ कै जानो ॥

जहवाँ धरती नाहिं अकासा । चाँद सूरज नाहिं परगासा ॥

जहवाँ ब्रह्मा विष्णु न जाहीं । दस अवतार न तहाँ समाहीं ॥

आदि जोति ना बसै निरंजन । जहवाँ शून्य शब्द नहिं गंजन ॥

निरंकार ना उहाँ अकारा । अक्षर शब्द नहिं विस्तारा ॥

जहवाँ जोगी जाए न पावै । महादेव ना तारी लावै ॥

जहवाँ हद अनहद नहिं जावै । बेहद वहाँ रहनी ना पावै ॥

जहवाँ नाहिं अगिनि परगासा । पाँच तत्व ना चलता स्वाँसा ॥

सुन्न गगन में उठत है, सो सब बोल में आवै ।

निःसदी वह बोलै नाहीं, सो सत सबद कहावै ॥

  • पलटू साहिब