भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

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न भ्वादिकाष्ठाद्यन्तः Wait, let's read the whole line 32: "परतो ऽङादेशो भवति । पुषादिर्देवाद्यन्तर्गणो गृह्यते, न भ्वादिकाष्ठाद्यन्तः" Wait, what is after "गृह्यते,"? There is a comma: "गृह्यते," Then: "न भ्वादिकाष्ठाद्यन्तः" or "न भ्वादिकष्टाद्यन्तः"? Look at: "न", "भ्", "व", "ा", "द", "ि" -> "भ्वादि-" Then: "क", "ष", "्", "ठ", "ा", "द", "्", "य", "न", "्", "त", "ः" -> "कष्ठाद्यन्तः" or "कृष्टाद्यन्तः"? Wait, in Bhvadi gana, is there "कृषि" (कृष्टादि)? Or "कष्टादि"? Wait, Kashika on 3.1.55: "पुषादिर्दिवाद्यन्तर्गणो गृह्यते, न भ्वादिकष्टाद्यन्तः।" or "न भ्वादिकृशाद्यन्तः"? Wait! Let's check the Sanskrit: "पुषादिर्दिवाद्यन्तर्गणो गृह्यते, न भ्वादिकृशाद्यन्तः" / "न भ्वादिकष्टाद्यन्