भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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स्येति" Wait, in "स लोपोऽनन्त्यस्येति": Wait, the sutra 7.2.79 is "लिङः सलोपोऽनन्त्यस्य"! Here it has a space: "स लोपोऽनन्त्यस्येति".

Now look at L17: "सीयुटसकारलोपः प्रत्ययैकदेशलोपस्तत्र प्रत्ययलक्षणेन झलोत्यनुनासिकलोपो" Wait, look at "सीयुटसकारलोपः": Is it "सीयुटः सकारलोपः" or "सीयुटसकारलोपः"? It is "सीयुटसकारलोपः" (no visarga after ट, joined). "प्रत्ययैकदेशलोपस्तत्र" - all one word. "प्रत्ययलक्षणेन" "झलोत्यनुनासिकलोपो" - wait, let's look at that word again: झ + ल + ो + त्य + नु + ना + सि + क + लो + पो Wait, could it be "झलोत्यनुनासिकलोपो"? Let's look at the letter between झ and त्य: It has vertical line, top matra. It's either 'लो' or 'ली'. As we noted, it is printed as 'लो' (or 'ली'). If printed as 'लो', it's झलोत्यनुनासिकलोपो. Let's transcribe what is visible: "झलो

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