भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

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। ३८६ ॥ काशिका ॥ ५ । १ ॥ धिकः। स्थलपथेनाहृतं, स्थालपथिकम्। स्थलपथेन गच्छति, स्थालपथिकः। कान्तारपथेनाहृतं, कान्तारपथिकम्। कान्तारपथेन गच्छती, कान्तारपथिकः ॥ अजपथशङ्कुपथाभ्यां चोपसंख्यानम् ॥ * ॥ अजपथेनाहृतं, गच्छति वा, ऽऽजप- थिकः। शङ्कुपथेनाहृतं, गच्छति वा, शाङ्कुपथिकः ॥ मधुकमरिचयोश्च स्थला- त् ॥ * ॥ स्थलपथेनाहृतं स्थालपथं मधुकम्। स्थालपथं मरिचम् ॥ कालात् ॥ ७८ ॥ कालादित्यधिकारः। यदिद ऊर्ध्वमनुक्रमिष्यामः कालादित्येवं तद्वे- दितव्यम्। वक्ष्यति। तेन निर्वृत्तम्। मासेन निर्वृत्तं, मासिकम्। चातुर्मासि- कम्। सांवत्सरिकम्। कालादित्यधिकारो व्युष्टादिभ्योऽणिति यावत् ॥ तेन