भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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ाविति"? Wait! Let's check Kashika on 6.1.85: "वर्णाश्रये प्रत्ययविधावयमन्तादिवद्भावो नेष्यते। तथाहि खट्वाभिरित्यत्रान्तवद्भावाभावादतो भिस ऐस् इति न भवति। हूयतेर् हुवाविति सम्प्रसारणपूर्वत्वस्यादिवद्भावाभावाद् 'आतो णलः' [७.१.३४?] इति न भवति।" Wait! Panini 7.1.34: "आतो णलः" - no, Panini 7.1.34 is "आत औ णलः"! Look at line 24: "त्वस्यादिवद्भावाभावादास्र औ णल इति न भवति ।" Wait! "आतो औ णल" is printed as: "आस्र औ णल" or "आत औ णल"? Look at line 24: "त्वस्यादिवद्भावाभावादास्र औ णल इति न भवति ।" Wait, 'आ', then 'स्र' or 'त'? Look at the letter: It is 'त' or 'स्र'? It has a loop like 'स्र' or 'त'? "आत औ णल इति न भवति" - it is 'आत औ णल' with broken type! The 'त' is a bit distorted, looking like 'स्र' or 'त'.