काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished828 पृष्ठ
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ः"?
No, 1.3.something? Or 7.4.something?
Let's read the characters in line 17-18:
ओण्योश्चेङि-
त्करणं ज्ञापकं नित्यमपि द्विर्वचनमुपधाह्रस्वत्वेन बाध्यतइति ।
Wait: ओण्योश्चेङित्करणं?
Wait, root ओण्: "ओण्योश्चेङित्करणं" -> wait, "ओण्योः" + "च" + "इङित्करणं" or "एङित्करणं"?
Wait, look at line 17:
ओण्योश्चेङ्कि-?
Wait: ओ ण्यो श्चे ङि with virama? No, ङि with त् = ङित्करणं!
"ओण्योश्चेङित्करणं ज्ञापकं..."
Wait, sūtra 7.4.24? No, "ओण आपने"?
No, "ओण्योः" - root ओण् (oṇ). "ओण्योश्चेङित्करणं ज्ञापकं नित्यमपि द्विर्वचनमुपधाह्रस्वत्वेन बाध्यत इति।"
Yes, ङित्करणम् (ṅit-karaṇam)!
Line 18: `त्करणं