भारतकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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" then "॥ हरि ॥" or "। हरि ।"? It has: "। कुबेर ॥ हरि ॥" - wait, look at L14 end: "समीर । कुबेर ॥ हरि ॥" Wait, why ॥ हरि ॥? Ah, it might be separated by danda. Wait, let's look at L15: "कर्म्मारइत्युत्तरपदवनशब्दस्यस्य संज्ञायाम् ॥" Wait, in Kashika: "हरिकर्म्मारयोरुत्तरपदवनशब्दस्य" or similar. Wait, let's look at L14-15: "कुबेर । हरि ।" or "॥ हरि ॥"? There are two vertical lines before हरि and two after! Yes, "॥ हरि ॥".

: "कर्म्मारइत्युत्तरपदवनशब्दस्यस्य संज्ञायाम् ॥ क्षुभ्नादिराकृतिगणः । अविहितल-" Wait, "वनशब्दस्यस्य" - exactly as printed: "वनशब्दस्यस्य".

: "क्षणो णत्वप्रतिषेधः क्षुभ्नादिषु द्रष्टव्यः ॥"

: "स्तोः श्चुना श्चुः ॥ ४० ॥"

: "सकारतवर्गयोः शकारचवर्गाभ्यां सन्निपाते शकारचवर्गावादेशौ भवतः ।" (Wait, is it "सन्