काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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१० काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| ग्रीस तथा भारत का प्राचीन काल से सम्बन्ध | ३१३ | वैदिक साहित्यमूलक भारतीय भैषज्य | ३३४ |
| ग्रीस में शस्त्रचिकित्सा का बाद में प्रचार | ३१७ | भारतीय भूगर्भ के अनुसार प्राचीन भैषज्यविषयक विमर्श | ३३६ |
| असीरिया तथा बेबिलोनिया में प्राचीन काल में भैषज्य विषयक ज्ञान | ३२२ | भिन्न-भिन्न देशों के प्राचीन भैषज्य के विमर्श की आवश्यकता | ३३७ |
| मिश्र, बेबिलोनिया, इरान, चीन आदि देशों में भारतीय शब्दों का सादृश्य | ३२२ | ५. उपसंहार परिच्छेद । | |
| प्राचीन भारत का अन्य देशों के साथ सम्बन्ध | ३२४ | प्राचीन आचार्यों का गौरव | ३३८ |
| धन्वन्तरि आदियों की प्राचीनता | ३२६ | प्राचीन ग्रन्थों का लोप और उनकी रक्षा | ३४० |
| प्रत्येक देश तथा काल में भारतीय स्त्रोतों की व्याप्ति | ३२८ | नेपाल ग्रन्थमाला का प्रथम प्रकाश | ३४३ |
| पौष्कलावत, करवीर्य तथा औरभ्रं आदि आचार्यों के विषय में विचार | ३२९ | कृतज्ञता प्रकाशन | ३४३ |
| परिशिष्ट । | |||
| ज्वरसमुच्चय में काश्यपसंहिता के मिलने वाले श्लोक | ३४४ |