काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
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भगास्थि १
ग्रीवा की अस्थियां १५
पीठ की अस्थियां ४५
छाती में उरोस्थियां १४
हन्वस्थि १
शिर की कपालास्थियां ४
पार्श्वास्थियां २४
पार्श्वास्थियों के स्थालक (Facets) २४
अर्बुदाकृति स्थालक २४
शङ्खदेश की अस्थियां २
हनुमूल को बांधने वाली अस्थियां २
ललाटास्थि १
नासिका में १
गण्डास्थि १
कूटास्थि १
कुल— ३६३
**वक्तव्य—**यहां पर पूर्व अस्थियों की संख्या ३६० बताई गई है परन्तु पृथक् २ गिनने पर वे ३६३ हो जाती हैं। चरक शा. अ. ७ में भी ३६० अस्थियों का उल्लेख किया गया है परन्तु उन्हें भी पृथक् २ गिनने पर वे ३६८ होती हैं। जयदेव विद्यालंकार ने अपनी चरक की टीका में हाथ पैर की शलाकास्थियों के ४ अधिष्ठान (चत्वार्यधिष्ठानान्येषां) तथा हाथ और पैरों के ४ पृष्ठ (चत्वारि पाणिपादपृष्ठानि) को नहीं गिना है। इस प्रकार ३६० संख्या पूरी की है। यहां भी यदि हम शलाकास्थियों के अधिष्ठानों को न गिनें तो संख्या कुछ अंश तक पूरी हो सकती है। चरकोक्त अस्थियां निम्न प्रकार से हैं—त्रीणि षष्ठ्यधिकानि शतान्यस्थ्ना सह दन्तोलूखलनखैः; तद्यथा—द्वांत्रिंशद्दन्ताः, द्वात्रिंशद्दन्तोलूखलानि, विंशतिर्नखाः, विंशतिः पाणिपादशलाकाः, चत्वार्यधिष्ठानान्येषां, चत्वारि पाणिपाद पृष्ठानि, ष्ठ्यङ्गुल्यस्थीनि, द्वे पाष्ण्योः, द्वे कूर्चाधः, चत्वारः पाण्योर्मणिकाः चत्वारः पादयोर्गुल्फाः, चत्वार्यरत्न्योरस्थीनि, चत्वारि जङ्घयोः, द्वे जानुनोः, द्वे कूर्परयोः, द्वे ऊर्वोः, बाह्वोः मांसयोर्द्वे, द्वावक्षकौ, द्वे तालुनी, द्वे श्रोणिफलके, एकं भगास्थि, पुंसां मेढ्रास्थि, एकं त्रिकसं श्रितम् एकं गुदास्थि, पृष्ठगतानि पञ्चत्रिंशत्, पञ्चदशास्थीनि ग्रीवायां, द्वे जत्रुणि, एकं हन्वस्थि, द्वे हनुमूलबन्धने, द्वे ललाटे, द्वे अक्ष्णोः, गण्डयोर्द्वे, नासिकाया त्रीणि घोणाख्यानि, द्वयोः पार्श्वयोश्चतुर्विंशतिश्चतुर्विंशतिः पञ्जरास्थीनि च पार्श्विकानि, तावन्ति चैषां स्थालिकान्यर्बुदाकाराणि तानि द्विसप्ततिः द्वौ शङ्खकौ, चत्वारि शिरःकपालानि, वक्षसि सप्तदश, इति त्रीणि षष्ठ्यधिकानि शतान्यस्थ्नामिति। इस प्रकार हमें प्रकृत ग्रन्थ तथा चरक की अस्थि गणना में निम्न अन्तर मिलता है—
| चरक | काश्यपसंहिता | |
|---|---|---|
| पाणिपादपृष्ठानि | ४ | × |
| कूर्चास्थियां | २ | ४ |
| हाथों की मणिकास्थि | ४ | २ |
| गुल्फास्थि | ४ | × |
| कूर्परास्थि | २ | × |
| अंसफलक | × | २ |