भारतकोश
कठोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

कठोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Katha Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished182 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
४४. ब्रह्मज्ञका सर्वात्म्यदर्शन१०३
४५. अरणिस्थ अग्निमें ब्रह्मदृष्टि१०५
४६. प्राणमें ब्रह्मदृष्टि१०६
४७. भेददृष्टिकी निन्दा१०७
४८. हृदयपुण्डरीकस्थ ब्रह्म१०९
४९. भेदापवाद१११
५०. अभेददर्शनकी कर्तव्यता११२
द्वितीया वल्ली
५१. प्रकारान्तरसे ब्रह्मानुसन्धान११४
५२. देहस्थ आत्मा ही जीवन है१२०
५३. मरणोत्तरकालमें जीवकी गति१२२
५४. गुह्य ब्रह्मोपदेश१२४
५५. आत्माका उपाधिप्रतिरूपत्व१२५
५६. आत्माकी असङ्गता१२७
५७. आत्मदर्शी ही नित्य सुखी है१२९
५८. सर्वप्रकाशकका अप्रकाश्यत्व१३३
तृतीया वल्ली
५९. संसाररूप अश्वत्थ वृक्ष१३६
६०. ईश्वरके ज्ञानसे अमरत्वप्राप्ति१४०
६१. सर्वशासक प्रभु१४१
६२. ईश्वरज्ञानके बिना पुनर्जन्मप्राप्ति१४२
६३. स्थानभेदसे भगवद्दर्शनमें तारतम्य१४३
६४. आत्मज्ञानका प्रकार और प्रयोजन१४४
६५. परमपदप्राप्ति१४९
६६. आत्मोपलब्धिका साधन सद्बुद्धि ही है१५२
६७. अमर कब होता है ?१५५
६८. उपसंहार१६०
६९. शान्तिपाठ१६३