कठोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

कठोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Katha Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished182 पृष्ठ
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ॐ
तत्सद्ब्रह्मणे नमः
कठोपनिषद्
मन्त्रार्थ, शाङ्करभाष्य और भाष्यार्थसहित
यस्मिन् सर्वं यतः सर्वं यः सर्वं सर्वदृक्तथा ।
सर्वभावपदातीतं स्वात्मानं तं स्मराम्यहम् ॥
शान्तिपाठ
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु । मा विद्विषावहै ।
ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!!
वह परमात्मा हम (आचार्य और शिष्य) दोनोंकी साथ-साथ रक्षा करें । हम दोनोंका साथ-साथ पालन करें । हम साथ-साथ विद्या-सम्बन्धी सामर्थ्य प्राप्त करें ! हम दोनोंका पढ़ा हुआ तेजस्वी हो । हम द्वेष न करें । त्रिविध तापकी शान्ति हो ।