कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)
Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation
स्वामी महेश्वरानन्द गिरि द्वारा
स्रोत: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४८ अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्ते सर्वं हास्मा इदं श्रैष्ठ्याय गम्यते ।।२०।। वह राजा यम है ऐसा समझकर मैं उसकी उपासना करता हूँ। इस प्रकार जो उसकी उपासना करता है उसकी श्रेष्ठता को सब कोई स्वीकार करते हैं" ।।२०।। स होवाच बालाकिर्य एवैष दक्षिणेऽक्षन्पुरुषस्तमेवाहमुपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठा नाम्न ।।२१।। बालाकि बोला-दाहिने नेत्र में जो पुरुष है उसकी मैं उपासना करता हूँ। अजातशत्रु ने कहा—"इस विषय में तू मुझसे संवाद मत कर ।।२१।। आत्माग्नेरात्मा ज्योतिष आत्मैति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्त एतेषं सर्वेषामात्मा भवति ।।२२ ।। यह पुरुष नाम का आत्मा, अग्नि का आत्मा तथा तेज का आत्मा है ऐसा समझ कर मैं इसकी उपासना करता हूँ। इस प्रकार जो इसकी उपासना करता है वह इन सबका आत्मा होता है" ।।२२।। सहोवाच बालाकिर्य एवैष सव्येक्षन्पुरुषस्तमेवाहमुपास इति तं होवचाजातशत्रर्मामैतस्मिन्समवादयिष्ठाः सत्यस्यात्मा विद्युत आत्मा तेजस आत्मैति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपासस्त एतेषा सर्वेषामात्मा भवतीति ।।२३।। बालाकि बोला—"बाएं नेत्र में जो पुरुष है उसकी मैं उपासना करता हूँ"। अजात शत्रु ने कहा—"इस विषय में तू मुझमे संवाद मत कर। यह पुरुष सत्य का आत्मा, विद्युत का आत्मा तथा तेज का आत्मा है, ऐसा समझ कर मैं उसकी उपासना करता हूँ। इस प्रकार इसकी उपासना करने वाला पुरुष इन सबका आत्मा होता है ।।२३।।