कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
DevanagariHindipublished361 पृष्ठ
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अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ६९ दष्टः ॥७॥ पञ्चम्या वलीकपलालज्वालेन ॥८॥ षष्ठ्यार्त्नी- ज्यापाशेन ॥६॥ द्वाभ्यां मधूद्वापान् पाययति ॥१०॥ नव- म्या श्वाविट्पुरीषम् ॥११॥ त्रिःशुक्लया मांसं प्राशयति ॥१२॥ दशम्यालाबुनाचमयति ॥१३॥ एकादश्या नाभिं बध्नाति ॥१४॥ मधुलावृषलिङ्गाभिः खलतुलपर्णी संक्षुद्य मधुमन्थे पाययति ॥१५॥ उत्तराभिर्भुङ्क्ते ॥१६॥ द्वारं सृजति ॥ १७ ॥ अग्निस्तक्मानमिति लाजान् पाययति ॥ १८ ॥ दावे लोहितपात्रेण मूर्ध्नि सम्पातानानयति ॥ १६ ॥ ओते म इति करीरमूलं काण्डेनेकदेशम् ॥२०॥ ग्रामात्पांसून् ॥२१॥ पश्चादग्नेर्मातुरुपस्थे मुसल- “कैरातपृश्न०” ऋचा को पढ़कर छप्पर की ओलती के तृणों को जला- [