कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
DevanagariHindipublished361 पृष्ठ
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अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ९३ यानुपाकरिष्यन्नभिष्याहारयति ॥२३॥ प्राशमारुक्ष्यास्यन् ॥२४ ॥ ब्रह्मोद्यं वदिष्यन् ॥ २५ ॥ ममाग्ने वर्च इति विमुडुक्ष्यमाणः प्रमत्तरज्जुं बध्नाति ॥२६॥ सभा च मेति भक्षयति ॥२७॥ स्थूणे गृह्णात्युपतिष्ठते ॥२८॥ यद्व- दामीति मन्त्रोक्तम् ॥२९॥ अहमस्मीत्यपराजितात्परिष- दमाव्रजति ॥३०॥२॥३८॥ दूष्या दूषिरसीति स्रक्त्यं बध्नाति ॥१॥ पुरस्तादग्नेः पिशङ्गं गां कारयति ॥२॥ पश्चादग्नेर्लोहिताजम् ॥३॥ यूषपिशितार्थम् ॥४॥ मन्त्रोक्ताः॥५॥वाशाकाम्पीलसिती- वारसदम्पुष्पा अवधाय ॥६॥ दूष्या दूषिरसि ये पुरस्तादी- शानां त्वा समं ज्योतिरृतो अस्यबन्ध