भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 127, कुल 361 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 127

अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ९५ संदंशेन ॥१५॥ अन्यत्पार्श्वं संवेशयति ॥१६॥ शकले- नोक्तम् ॥१७॥ अभ्यक्तेति नवनीतेन मन्त्रोक्तम् ॥१८॥ दर्भरज्ज्वा संनह्योत्तिष्ठैवेत्युत्थापयति ॥१९॥ सव्येन दीपं दक्षिणेनोदकालाम्बवादाय वाग्यताः ॥२०॥ प्रैषकृदग्रतः ॥२१॥ अनावृतम् ॥२२॥ अगोषपदम् ॥२३॥ अनुदक- खातम् ॥२४॥ दक्षिणाप्रवणे वा स्वयंदीर्णे वा स्वकृते वेरिणेऽन्याशायां वा निदधाति ॥२५॥ अलाबुना दीप- मवसिच्य यथा सूर्य इत्यावृत्याव्रजति ॥२६॥ तिष्ठं- स्तिष्ठन्तीं महाशान्तिमुच्चैरभिनिगदति ॥२७॥ मर्माणि सम्प्रोक्षन्ते ॥२८॥ कृष्णसीरेण कर्षति ॥२९॥ अधि सीरेभ्यो दश दक्षिणा ॥३०॥ अभिचारदेशा मंत्रेषु विज्ञायन्ते तानि मर्माणि ॥३१॥३॥३९॥ यददः सम्प्रयतीरिति येनेच्छेन्नदी प्रतिपद्येतेति प्रसि- को खिलावे ॥१६॥१७॥ नवनीत से दोनों आँखों ( कृत्या की ) को आँज देवे ॥१८॥ अधोमुखी हुई कृत्या को कुश की रस्सी से बाँध देवे और प्रैषकृत् से उसे “उत्तिष्ठ०” इस आधी ऋचा से उठवावे ॥१९॥ बायें हाथ में दीप एवं दहिने हाथ से जलपूर्ण तुम्बरी लेकर उसे उठावे ॥२०॥ प्रैषकृत् से आगे २ चले॥२१॥ वृत्ति विसर्जित हो उस स्थान में जावे, जहां गौ के पैर का चिन्ह न हो ॥२२॥२३॥ बिना जल के खात हो ॥२४॥ जिस स्थान का जल दक्षिण में आकर गिरे, जिसको किसी ने खोदवाया न हो, या ऊषर भूमि में या अन्य शाला में डाल देवे ॥२६॥ कर्त्ता स्वयं खड़ा हो कृत्या को भी खड़ी कर महाशान्ति उच्च स्वर से बोले ॥२७॥ उसके मर्म स्थानों का संप्रोक्षण करे ॥२८॥ कृत्या स्थान को काले बैलों द्वारा हल से जोतवा देवे ॥२९॥ ब्राह्मण कर्त्ता को दश गौयें दक्षिणा देवे ॥३०॥ अभिचार देशों का पता मंत्रों से लगता है—वे ही मर्म हैं ॥३१॥३॥३९॥ यह उनतालीसवीं कण्डिका समाप्त हुई ॥३९॥ अब नदी के प्रवाह विधि को कहते हैं। जो चाहे कि नदी के प्रवाह

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद) · पृष्ठ 127, कुल 361 में से · BharatKosha