भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

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—इत्याद्यष्टभि-" Line 30 starts with: "र्ऋग्भिर्द्विधाकरणं ।" Wait, look at the first character of line 30: It is 'ऋ' with a repha on top! 'र्ऋ'! Then 'ग्भि' with repha? "र्ऋग्भिर्द्विधाकरणं"! Wait, 'अष्टभि-' + 'र्ऋग्भिर्' = अष्टभिर्ऋग्भिर्! Yes, exactly: "र्ऋग्भिर्द्विधाकरणं ।"

Line 31: "घटमन्यस्मै पुरुषाय प्रदाय “अग्नेर्भाग”—इत्यष्टभिस्तापने मन्त्रः । बर्हिर्दक्षिणामुखं"

Line 32: "उपविश्य भाजनमग्रे कृत्वा “वातस्य रंहितस्य”—इति मन्त्रेण उदकं गृह्य । “सम-" Wait, is it "गृह्य" or "गृह्णाति" or "गृह्य"? Look at line 32: उ द कं गृ ह्य । “ स म - Yes, "गृह्य । “सम-"!

Everything is verified carefully. Ready to output the transcription line by line.४० अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रस्य— शरभृष्टिकर्म सपत्नक्षयणीयकर्माणि षट्ग्राममेत्य च कर्माणि षट्मण