भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

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अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । २९ रेऽसावित्यपनोदनानि ॥१४॥ फलीकरणतुषबुसावतक्ष- णान्यावपति ॥१५॥ अन्वाह ॥१६॥ अग्निर्नः शत्रूनग्निनों दूत इति मोहनानि ॥१७॥ ओदनेनोपयम्य फलीकर- णानुलूखलेन जुहोति ॥१८॥ एवमणून् ॥१९ एकविंश- त्या शर्कराभिः प्रतिनिष्पुनाति ॥२०॥ अप्वां यजते ॥२१॥ संशितमिति शितिपदीं सम्पातवतीमवसृजति ॥२२॥ उद्वहत्सुयोजयेत् ॥२३॥ इममिन्द्रेति युक्तयोः प्रदानान्तानि ॥२४॥ दिग्युक्ताभ्यां नमो देववधेभ्य इत्युपतिष्ठते ॥२५॥ त्वया मन्यो यस्ते मन्यो इति संर- म्भणानि ॥२६॥ सेने समीक्षमाणो जपति ॥२७॥ भाङ्ग- पाश, इन तृणों में किसी एक की जड़ को बांधे इस का फल शत्रु प्रयुक्त शस्त्र