कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३ ) कं. सूत्र पृष्ठ २२-१६ रस कर्म कुल । कुल की पुष्टि कर्म, हेतु कर्म । समृद्धिकर्म । ४७-४९ समुद्रकर्म । २३-१७ नये मकान ( पत्थर, ईंट, मट्टी, खर, काठ आदिका क्यों न ४९-५१ हो ) में गृहप्रवेश कर्म बच्छरे के कान को छेदने के नियम । २४-४६ खेत बोने का कर्म और गोशाला कर्म । गृह सम्बन्धि बातें ५१-५५ कृषि कर्म । पुष्टि कर्म । सलिलगण के मन्त्र । अध्याय ॥ ४ ॥ २५-३७ रोगों की दवा आदिका वर्णन । ज्वर का रोग यंत्र बान्धने से ५५-५८ छूटे । अतीसार, बहुमूत्र, हरैं एवं कपूर के यंत्र बान्धने से । पिशाच भगाने का उपाय । जलोदरादि रोगों का यंत्र । २६-४३ वात, पित्त, कफ, अतिकास, शिर पीड़ा, वातज्वर, कीटि ५८-६३ बन्ध, शिरो रोग, वातगुल्म, शरीर के किसी अङ्ग से या शरीर के बाहर रुधिर बहे इसका यंत्र । हृद्रोग, सफेद कुष्ट, यक्ष, अप्सरा, भूत, प्रेत, और ग्रहादिका । राजयक्ष्मा आदि रोग, जलोदर, कुल परम्परा से होने वाले रोगों का यंत्र । २७-३४ पिशाचगृहीत, क्षेत्रिय रोगों का यंत्र, अरुषी, उदर, गण्ड- ६३-६६ लक, यक्ष्मा, सर्व रोग भैषज्य । २८-२० हथियार से कटे रुधिर का, विषका, बुद्धिभ्रष्ट का, सूतिका ६६-६८ रोग को छुड़ाने का उपाय । २९-३० सर्प काटे का, ज्वर, कृमिरोग, राक्षसगृहीत का उपाय । ६८-७० ३०-१८ पित्तज्वर, केशगिरते हुये और केश बढाने का, कलेजा का ७०-७२ जलन, जलोदर, कामला-गण्डमाला । ३१-२८ रक्षोग्रह, किसी अङ्ग का या सब अङ्गों में शूल होने की दवा । ७२-७५ अक्षत व्रण, पक्षिके काटने कास एवं कफ गिरने की दवा । ३२-२९ जम्बुआ पकड़े की दवा । गण्डमाला, राजयक्ष्मा, सांप काटे ७५-७८ की, सर्वरोगों की दवा । मृतावत्सा की दवा । ३३-२० सुख से बच्चा पैदा होने का यत्न ७८-८० ३४-२७ वन्ध्या को सन्तान होने का, मृत वत्सा, बच्चा होकर मरजावे- ८०-८२ बच्चे मरे या स्याने मरजाया करे इसका उपाय कुमारी को पति मिले ।